मेरठ में पुलिस बर्बरता के आरोप: दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने लगाए गंभीर आरोप, अतुल प्रधान ने जांच की मांग की
दोनों नेताओं ने करीब 12 घंटे हिरासत में रखने और मारपीट का लगाया आरोप, विधायक अतुल प्रधान बोले- निष्पक्ष जांच के साथ दोषी अधिकारियों पर दर्ज हो मुकदमा
मेरठ: किसान नेता दिग्विजय भाटी और दलित नेता मोहित जाटव के साथ कथित पुलिस बर्बरता का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने दोनों नेताओं के साथ प्रेसवार्ता कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दोनों नेताओं ने पुलिस हिरासत में मारपीट और अमानवीय व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
करीब 12 घंटे हिरासत में रखने का आरोप
दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव का दावा है कि वे 19 अगस्त को अपनी सफाई देने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे थे। उनका कहना है कि पिछले तीन दिनों से कार्यालय की ओर से उन्हें बातचीत के लिए फोन किए जा रहे थे। दोनों नेताओं के मुताबिक, कार्यालय पहुंचने के बाद अचानक पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। आरोप है कि उन्हें पहले कार्यालय के एक कमरे में ले जाकर मारपीट की गई और बाद में चेहरे ढककर विशेष अभियान दल के कार्यालय ले जाया गया।
हाथ-पैर बांधकर मारपीट का आरोप
दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि विशेष अभियान दल के कार्यालय में उनके साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किया गया। उनका दावा है कि हाथ-पैर बांधकर उन्हें उल्टा लटकाया गया और मारपीट की गई। दिग्विजय भाटी ने बताया कि उनके चेहरे और आंख पर चोट आई है। चिकित्सकीय जांच के बाद उन्हें आगे चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग जांच कराने की सलाह दी गई है। उन्होंने सिर पर चोट और अंदरूनी चोट की आशंका भी जताई।
मुठभेड़ में मारने की धमकी देने का दावा
प्रेसवार्ता में दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें मुठभेड़ में मारने की धमकी दी गई। उनका दावा है कि पुलिसकर्मियों के सामने कथित तौर पर उन्हें गोली मारने की बात कही गई। दोनों ने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उन्हें पर्याप्त पानी तक नहीं दिया गया। मोहित जाटव ने कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किए जाने और नाचने के लिए मजबूर किए जाने का आरोप लगाया।
मारपीट की आवाज रिकॉर्ड करने का दावा
दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने दावा किया कि कथित मारपीट के दौरान उनकी चीखों को मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया गया और अधिकारियों तक सुनाया गया। प्रेसवार्ता के दौरान दिग्विजय भाटी भावुक हो गए और अपनी बात बताते हुए रो पड़े।
अतुल प्रधान ने निष्पक्ष जांच की मांग की
विधायक अतुल प्रधान ने तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय और सिविल लाइन थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। अतुल प्रधान ने कहा कि वह इस मामले को विधानसभा में उठाएंगे। इसके अलावा अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग, मानवाधिकार आयोग और मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक के सामने भी शिकायत रखी जाएगी।
आधी रात को थाने पहुंचे अतुल प्रधान
अतुल प्रधान के मुताबिक, जब उन्हें दोनों नेताओं के हिरासत में होने की जानकारी मिली तो वह देर रात पुलिस अधिकारियों से मिलने पहुंचे। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से बातचीत की और बाद में उनके आवास पर भी मुलाकात की। विधायक का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा है या उससे पूछताछ करनी है तो कानून में पूरी प्रक्रिया निर्धारित है। किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर जाकर कार्रवाई करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
स्कूटी से गिरने की बात लिखवाने का भी आरोप
अतुल प्रधान ने आरोप लगाया कि बाद में दोनों नेताओं से कथित रूप से यह लिखवाया गया कि वे स्कूटी से जा रहे थे और रास्ते में गाय से टकराकर गिर गए, जिससे उन्हें चोट लगी। विधायक ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि दोनों सड़क पर गिरकर घायल हुए होते तो सड़क पर घिसटने के निशान भी दिखाई देने चाहिए थे। हालांकि, इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ललिता गौतम प्रकरण का भी जिक्र
प्रेसवार्ता के दौरान मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़ा पुराना विवाद भी सामने आया। दलित छात्रा की हत्या के बाद परिवार की ओर से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई थी। आरोप है कि कार्रवाई की मांग को लेकर पीड़ित परिवार और समर्थकों ने 8 जुलाई को कलेक्ट्रेट गेट पर धरना दिया था। उस दौरान पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर भी विवाद हुआ था। अब दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के आरोपों के बाद यह पुराना मामला भी फिर चर्चा में आ गया है।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल दोनों नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। मामले में चिकित्सकीय रिपोर्ट, कथित रिकॉर्डिंग, पुलिस अभिलेख और अन्य साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। विधायक अतुल प्रधान ने स्पष्ट किया है कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वह इसे विधानसभा सहित संबंधित आयोगों के सामने उठाएंगे।
