हिजाब विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले से भड़के ओवैसी, बोले- धार्मिक अधिकारों के खिलाफ है फैसला
स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति वाली याचिका खारिज, ओवैसी ने अनुच्छेद 25 और 19 का हवाला देकर फैसले पर जताई आपत्ति
प्रयागराज: स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। न्यायालय के फैसले पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जताई है। ओवैसी ने फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि यह संविधान में दिए गए धार्मिक अधिकारों के खिलाफ है।
हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
मामला प्रयागराज के एक निजी स्कूल की कक्षा 11 में पढ़ने वाली मुस्लिम छात्रा से जुड़ा है। छात्रा ने स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित करने के लिए पर्याप्त धार्मिक या कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है। न्यायालय ने स्कूल को सभी विद्यार्थियों के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म लागू करने के अधिकार को भी स्वीकार किया।
ओवैसी ने फैसले पर जताई कड़ी आपत्ति
असदुद्दीन ओवैसी ने हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 में दिए गए अधिकारों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत व्यक्ति को अपनी आस्था और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आचरण करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। ओवैसी ने यह भी कहा कि इस मामले में अदालत को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए था। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे फैसलों का असर मुस्लिम छात्राओं की शिक्षा पर भी पड़ सकता है।
ओवैसी बोले- हिजाब धार्मिक आस्था का हिस्सा
ओवैसी ने हाईकोर्ट की उस टिप्पणी से भी असहमति जताई, जिसमें हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित नहीं माना गया। उनका कहना है कि हिजाब पहनना इस्लाम में धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत विश्वास से जुड़ा विषय है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार धार्मिक प्रथाओं का पालन करने का अधिकार होना चाहिए।
हिजाब और यूनिफॉर्म को लेकर फिर तेज हुई बहस
हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्कूल यूनिफॉर्म, धार्मिक स्वतंत्रता और हिजाब को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर स्कूलों में समान यूनिफॉर्म व्यवस्था लागू करने के अधिकार का सवाल है, तो दूसरी ओर धार्मिक आस्था और संवैधानिक अधिकारों को लेकर तर्क दिए जा रहे हैं। फिलहाल ओवैसी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
