सितंबर से हर बृहस्पतिवार सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक होगी सुनवाई, एक ही मंच पर मानचित्र से जुड़ी आपत्तियों और समस्याओं का समाधान
बरेली : भवन मानचित्र स्वीकृति को लेकर बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) के चक्कर लगाने वाले आवेदकों और आर्किटेक्ट्स के लिए राहत की खबर है। प्राधिकरण सितंबर से हर बृहस्पतिवार ‘मानचित्र समाधान दिवस’ आयोजित करेगा। बीडीए सभागार में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में भवन मानचित्र से जुड़ी समस्याओं, तकनीकी आपत्तियों और लंबित मामलों के समाधान के लिए संबंधित अधिकारी एक ही मंच पर मौजूद रहेंगे।
एक ही जगह मानचित्र से जुड़ी समस्याओं की सुनवाई
बीडीए के मुताबिक, ‘मानचित्र समाधान दिवस’ का उद्देश्य भवन मानचित्रों की स्वीकृति से संबंधित समस्याओं का नियमानुसार और समयबद्ध समाधान करना है।आवेदक और आर्किटेक्ट सीधे संबंधित अधिकारियों के सामने अपना प्रकरण रख सकेंगे। इससे तकनीकी आपत्तियों को समझने और उनका समाधान कराने में तेजी आने की उम्मीद है।
लो-रिस्क नक्शों का तेजी से निस्तारण
प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत ले-आउट में स्थित भूखंडों के भवन मानचित्रों में यदि सभी आवश्यक अभिलेख उपलब्ध हैं तो नियमानुसार उसी दिन निस्तारण या अनुमोदन की कार्यवाही की जाएगी। इससे पात्र आवेदकों को मानचित्र स्वीकृति के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
हाई-रिस्क मामलों में तेजी की तैयारी
हाई-रिस्क भवन मानचित्रों से जुड़े भू-उपयोग के मामलों में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होने पर नियमानुसार त्वरित भू -उपयोग आख्या उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जाएगी। इससे ऐसे मामलों में आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
तकनीकी आपत्तियों का मौके पर समाधान
मानचित्र स्वीकृति के दौरान आने वाली तकनीकी समस्याओं और आपत्तियों को लेकर आवेदक या आर्किटेक्ट संबंधित अधिकारियों से सीधे संवाद कर सकेंगे। बीडीए का कहना है कि इससे समस्या की स्थिति स्पष्ट होने के साथ उसके समाधान की प्रक्रिया भी समयबद्ध हो सकेगी।
शमन मानचित्रों पर भी होगी सुनवाई
शमन मानचित्रों से जुड़ी समस्याओं और आपत्तियों को भी ‘मानचित्र समाधान दिवस’ में शामिल किया जाएगा। संबंधित अधिकारी प्रकरण की समीक्षा कर नियमानुसार समाधान की दिशा में कार्रवाई करेंगे।
‘दफ्तरों के चक्कर नहीं, एक मंच पर समाधान’
बीडीए का कहना है कि इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य आमजन को भवन मानचित्र से जुड़े काम के लिए अलग-अलग पटल और कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है। आवेदक, आर्किटेक्ट और अधिकारी एक ही स्थान पर प्रकरण पर चर्चा कर सकेंगे। प्राधिकरण के अनुसार, इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और आवेदकों को अपने प्रकरण की स्थिति तथा आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में सीधे जानकारी मिल सकेगी।
पूर्ण दस्तावेज वाले पात्र मामलों में अनावश्यक देरी नहीं
बीडीए ने स्पष्ट किया है कि नियमानुसार और पूर्ण अभिलेखों के साथ प्रस्तुत पात्र प्रकरणों में अनावश्यक विलंब नहीं होने दिया जाएगा। इसके साथ ही आवेदकों और आर्किटेक्ट्स को मानचित्र स्वीकृति से संबंधित जरूरी तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। बीडीए के मुताबिक,यह पहल जनभागीदारी,पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा को बढ़ावा देने के साथ शहर के नियोजित और व्यवस्थित विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
