मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की हत्या के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला, जमीन विवाद में हुई थी दोनों की गोली मारकर हत्या
औरैया: उत्तर प्रदेश के औरैया में हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में एमपी-एमएलए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने समाजवादी पार्टी के पूर्व विधान परिषद सदस्य कमलेश पाठक और उनके दो भाइयों संतोष पाठक व राम पाठक समेत कुल 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला करीब छह साल पहले अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या से जुड़ा है। सुधा चौबे शिक्षिका थीं।
15 जनवरी 2020 को हुई थी दोहरी हत्या
15 जनवरी 2020 को औरैया में जमीन विवाद को लेकर मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि वारदात के दौरान आरोपियों ने पीड़ित परिवार के लोगों के साथ मारपीट भी की थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने मामले में कमलेश पाठक और उनके भाइयों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया था।
छह साल चली अदालत में सुनवाई
मामले की सुनवाई करीब छह साल तक चली। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से कुल 72 गवाह अदालत में पेश हुए। पीड़ित पक्ष की ओर से 33 लोगों ने गवाही दी, जबकि कमलेश पाठक की ओर से 39 गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने बुधवार को कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक और राम पाठक समेत 10 आरोपियों को दोहरे हत्याकांड का दोषी करार दिया। इसके बाद सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
मंदिर की एक बीघा जमीन को लेकर शुरू हुआ था विवाद
बताया जाता है कि कमलेश पाठक और मंजुल चौबे के बीच पहले दोस्ती थी, लेकिन बाद में मंदिर की करीब एक बीघा जमीन को लेकर दोनों के संबंध खराब हो गए। आरोप है कि कमलेश पाठक इस जमीन पर अपना दावा कर रहे थे, जबकि मंजुल चौबे इसका विरोध कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, 15 जनवरी 2020 को कमलेश पाठक विवादित जमीन पर कुर्सी डालकर बैठे थे। इसी दौरान मंजुल चौबे के पिता वहां पहुंचे और उन्होंने इसका विरोध करते हुए कमलेश पाठक को कुर्सी से गिरा दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।
विवाद के दौरान हुई थी फायरिंग
विवाद बढ़ने पर दोनों परिवारों के लोग मौके पर पहुंच गए। कमलेश पाठक के भाई संतोष पाठक और उनका गनर भी वहां पहुंचा। आरोप है कि गनर ने मंजुल चौबे के पिता के साथ मारपीट की। इसी दौरान कमलेश पाठक और उनके भाई संतोष पाठक की ओर से फायरिंग की गई। गोली लगने से मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कमलेश पाठक, उनके भाइयों संतोष पाठक और राम पाठक समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया था। अगले दिन चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
11 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट
पुलिस ने मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। वर्ष 2020 में अदालत में दाखिल आरोपपत्र में भी 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 10 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई थी। एक आरोपी नाबालिग होने के कारण उसे किशोर न्यायालय भेज दिया गया था। वहीं, कमलेश पाठक के गनर अवनीश प्रताप सिंह को गैंगस्टर अधिनियम के मामले में बरी कर दिया गया था।
करोड़ों की संपत्ति भी हुई थी जब्त
हत्याकांड के बाद प्रशासन ने कमलेश पाठक और उनके परिवार से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की थी। प्रशासन के अनुसार कमलेश पाठक की करीब 36.15 करोड़ रुपये, संतोष पाठक की 9.75 करोड़ रुपये और रामू पाठक की करीब 7.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी।
कमलेश पाठक का रहा है लंबा राजनीतिक सफर
कमलेश पाठक औरैया के भड़ारीपुर गांव के निवासी हैं और लंबे समय तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे। वह कम उम्र में ही विधायक बन गए थे और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। वर्ष 1990 में उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाया गया था। वर्ष 1991 में उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला। वर्ष 2002 में उन्होंने डेरापुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक का पद संभाला। हालांकि वर्ष 2007 में दिबियापुर विधानसभा सीट और वर्ष 2012 में सिकंदरा विधानसभा सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया। मई 2015 में उन्हें दोबारा विधान परिषद भेजा गया।
दोस्ती से दुश्मनी तक पहुंचा था रिश्ता
मंजुल चौबे और कमलेश पाठक के बीच कभी करीबी संबंध बताए जाते थे। बताया जाता है कि मंजुल चौबे के राजनीतिक सफर में भी कमलेश पाठक ने उनकी मदद की थी। मंजुल चौबे कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए थे। बाद में राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और जमीन विवाद के चलते दोनों के बीच संबंध बिगड़ते चले गए। वर्ष 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान भी दोनों के बीच मतभेद सामने आए थे। इसके बाद मंजुल चौबे की भाजपा नेताओं से नजदीकी बढ़ने लगी। इसी बीच पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास की एक बीघा जमीन को लेकर विवाद और गहरा गया। मंजुल चौबे ने कमलेश पाठक के दावे का विरोध किया। धीरे-धीरे दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि 15 जनवरी 2020 को गोलीकांड में मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की जान चली गई।
छह साल बाद दोहरे हत्याकांड में सजा
करीब छह साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने कमलेश पाठक और उनके दो भाइयों समेत 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के फैसले के बाद अब इस बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड का एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव पूरा हो गया है।
