45 मिनट की सरकार-CJP बैठक बेनतीजा, दो मांगों पर विचार का भरोसा, मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक कानून और सख्त करने को दी मंजूरी, 10 साल जेल-10 करोड़ जुर्माने का प्रस्ताव
नई दिल्ली : NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर देश की राजनीति और छात्र आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। एक ओर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है, तो दूसरी ओर संसद से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। वहीं आंदोलन का नेतृत्व कर रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) और केंद्र सरकार के बीच करीब 45 मिनट तक चली अहम बैठक भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इस बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक के मामलों में सख्ती दिखाते हुए लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधन में पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
राहुल गांधी बोले- छात्रों की मांगें माननी होंगी

दिल्ली में जारी प्रदर्शन के बीच राहुल गांधी ने कहा कि “धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही होगा। सरकार छात्रों की मांग पूरी करे।” उन्होंने प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पैलेट गन के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के साथ हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।
सरकार और CJP के बीच 45 मिनट चली बैठक
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने CJP प्रतिनिधियों आशुतोष राका और सौरव दास के साथ बैठक की। करीब 45 मिनट तक चली इस बैठक में CJP ने सरकार को अपना मांग पत्र सौंपा। बैठक के बाद CJP नेताओं ने कहा कि उन्होंने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं होगा। संगठन का दावा है कि सरकार ने तीन में से दो मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है और अंतिम जवाब के लिए शनिवार तक का समय मांगा है।
CJP की तीन प्रमुख मांगें

CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। पेपर लीक से प्रभावित और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा। प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की मांग की है। CJP का दावा है कि सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों को हटाने पर विचार करने का आश्वासन दिया है।हालांकि, संगठन ने साफ कर दिया है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन देशभर में और तेज किया जाएगा।
कैबिनेट का बड़ा फैसला, कानून होगा और सख्त
नीट पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 को और सख्त बनाने वाले संशोधन को मंजूरी दे दी गई।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार
पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की सजा होगी। 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान।संगठित पेपर लीक नेटवर्क और परीक्षा माफिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई। संशोधन विधेयक को अगले सप्ताह संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना।
पहले क्या था कानून?
वर्तमान कानून के तहत पेपर लीक कराने पर 3 से 5 वर्ष की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माना। संगठित गिरोह पर 5 से 10 वर्ष की जेल और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना। दोषी परीक्षा एजेंसियों पर 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना, परीक्षा की लागत की वसूली और चार साल तक परीक्षा कराने पर रोक का प्रावधान है।सरकार अब इन प्रावधानों को और कठोर बनाने की तैयारी में है।
दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा
जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई स्थानों पर फेशियल रिकॉग्निशन कैमरे लगाए गए हैं। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों का संचालन प्रभावित रहा और कुछ स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद भी किया गया।
पीएम मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के नाम जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक लाखों छात्रों और उनके परिवारों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कानून को और कठोर बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पेपर लीक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
अब सबकी नजर शनिवार पर
सरकार ने CJP से अंतिम निर्णय के लिए शनिवार तक का समय मांगा है। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो CJP ने आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी दी है। वहीं संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक कानून में प्रस्तावित संशोधन पर भी जोरदार राजनीतिक बहस होने के आसार हैं।
