बरेली: ज़िले में पिछले कुछ दिनों से बारिश कम हुई है, लेकिन पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और डैम से छोड़े जा रहे अतिरिक्त पानी का असर अब रामगंगा नदी में साफ दिखाई देने लगा है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और खतरे के निशान की ओर बढ़ने से तटीय इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। जिला प्रशासन ने भी संभावित बाढ़ को देखते हुए पूरी तैयारी शुरू कर दी है।
कई गांवों में बढ़ी चिंता, फसलों पर मंडरा रहा खतरा
रामगंगा नदी का तेज बहाव अब किनारों तक पहुंचने लगा है। इसका असर सुभाषनगर, विशारतगंज, अलीगंज, बिथरी चैनपुर, फरीदपुर और क्योंलड़िया क्षेत्र के निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों को डर है कि अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो खेतों में खड़ी धान और दूसरी फसलें पानी में डूब सकती हैं। कई घरों में भी बाढ़ का पानी पहुंचने की आशंका है। एहतियात के तौर पर लोग जरूरी सामान सुरक्षित जगहों पर रख रहे हैं और पशुओं को ऊंचे स्थानों पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासन अलर्ट, राहत और बचाव की पूरी तैयारी
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले की सभी बाढ़ चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा है। संवेदनशील गांवों की लगातार निगरानी की जा रही है और अधिकारी हर पल जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए स्कूलों और पंचायत भवनों को अस्थायी राहत शिविर के रूप में चिन्हित किया गया है। इसके अलावा रेस्क्यू टीमों, नावों और अन्य जरूरी संसाधनों की भी व्यवस्था कर ली गई है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने तटीय गांवों के लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, बिना जरूरत नदी के किनारे न जाएं और किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें। फिलहाल प्रशासन की पूरी नजर रामगंगा नदी के बढ़ते जलस्तर पर बनी हुई है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
