गोरखपुर में भाजपा प्रशिक्षण महाअभियान का शुभारंभ, राष्ट्रवाद, आपातकाल और विकास के मुद्दों पर विपक्ष को घेरा
गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना सत्ता प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रहित की रक्षा के उद्देश्य से हुई थी।
अनुच्छेद 370 पर कही बड़ी बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर में विशेष दर्जे का विरोध करते हुए “एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा दिया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर डॉ. मुखर्जी के उस सपने को साकार किया, जिसके लिए जनसंघ और भाजपा के कार्यकर्ता दशकों तक संघर्ष करते रहे।
कांग्रेस पर तुष्टिकरण का आरोप
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मंत्री थे, लेकिन उन्होंने कांग्रेस की कथित तुष्टिकरण की नीतियों के विरोध में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि जनसंघ की यात्रा सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और कश्मीर की एकता की रक्षा के लिए शुरू हुई थी।
आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर हमला
मुख्यमंत्री ने वर्ष 1975 के आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने उस समय लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया था। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान एक लाख से अधिक जनसंघ कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया था।
विकास और योजनाओं का भी किया जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि देश के विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता आवश्यक है और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को स्थिर नेतृत्व दिया। उन्होंने दावा किया कि 2014 से पहले वामपंथी उग्रवाद लगभग 120 जिलों में फैला था, जो अब सिमटकर एक-दो जिलों तक रह गया है। उन्होंने कहा कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसी योजनाओं ने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है और पिछले 11-12 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
कार्यकर्ताओं को दिया वैचारिक संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण महाअभियान का उद्देश्य भाजपा कार्यकर्ताओं को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से जोड़ना तथा संगठन में सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना को मजबूत करना है।
