हैदराबाद : धरना चौक पर रविवार को नीट पेपर लीक और सीबीएसई की मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इस प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी समेत कई सामाजिक और छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग उठाई। प्रदर्शन का मुख्य केंद्र नीट परीक्षा में सामने आए पेपर लीक के आरोप और सीबीएसई के मूल्यांकन तंत्र को लेकर छात्रों और अभिभावकों की नाराजगी रही।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के सदस्य पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। “हमें न्याय चाहिए” और “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” जैसे नारों से पूरा धरना स्थल गूंज उठा। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। उनका आरोप था कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही गड़बड़ियां और पेपर लीक की घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए होते तो लाखों छात्रों को मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता।
इस विरोध प्रदर्शन में प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। उन्होंने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल को सत्ता में लाने या किसी सरकार को हटाने के उद्देश्य से नहीं किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन जनता को जागरूक करने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में एक प्रयास है।
सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका उद्देश्य राजनीति में प्रवेश करना या कोई नई पार्टी बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के साथ जो अन्याय हो रहा है, उसे समाप्त करने के लिए समाज को जागरूक करना जरूरी है। उनके अनुसार यह आंदोलन केवल विरोध का माध्यम नहीं बल्कि एक नई जागृति और बदलाव की शुरुआत है।
अपने संबोधन में वांगचुक ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों की जिम्मेदारी लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे लोकतंत्र की जरूरत है जहां नागरिक बिना किसी भय और भेदभाव के अपनी बात रख सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को डर और नफरत से मुक्त समाज बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और स्वतंत्रता मिले।
वांगचुक ने कहा कि यह लड़ाई केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं है। उन्होंने इसे व्यवस्था में सुधार की व्यापक मुहिम बताया। उनके अनुसार यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तो देश का भविष्य भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी समस्या परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर है। लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ रही हैं और लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। इससे न केवल छात्रों का मनोबल टूटता है बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।
धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने भी इसी चिंता को दोहराया। उनका कहना था कि छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली मिलनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि परीक्षा आयोजन और मूल्यांकन प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस बीच पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धरना स्थल के आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को रविवार दोपहर तक ही धरना देने की अनुमति दी गई थी। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
हैदराबाद में हुआ यह प्रदर्शन एक बार फिर देश में परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को सामने ले आया है। छात्रों और अभिभावकों की बढ़ती चिंताओं के बीच अब निगाहें सरकार और संबंधित एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे इन मुद्दों के समाधान के लिए क्या कदम उठाती हैं। फिलहाल यह विरोध प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और सुधार की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देने में सफल रहा है।
