रामगंगा किनारे अवैध कब्जों पर चलेगा बुलडोजर? 166 गांवों में खिंचेगी ‘लक्ष्मण रेखा’
बरेली : यूपी के बरेली से गुजरने वाली रामगंगा नदी के किनारे बढ़ते अवैध कब्जों और पक्के निर्माण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर फ्लड प्लेन जोन का सीमांकन कराया जा रहा है। इसके तहत रामगंगा नदी के दोनों किनारों पर पिलर लगाए जाएंगे, ताकि नदी क्षेत्र में अवैध कब्जों और निर्माण को रोका जा सके। प्रशासन के मुताबिक जिले के 166 गांव फ्लड प्लेन जोन में शामिल किए गए हैं।अधिकारियों का मानना है कि नदी की जमीन पर लगातार हो रहे अतिक्रमण की वजह से हर साल बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है और आसपास के गांवों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
2.24 करोड़ की योजना, री-टेंडर प्रक्रिया शुरू
इस परियोजना को सिंचाई विभाग और बाढ़ खंड मुरादाबाद की निगरानी में लागू किया जा रहा है। योजना के लिए करीब 2.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। हालांकि पिलर लगाने के लिए निकाले गए पहले टेंडर में कोई ठेकेदार सामने नहीं आया, जिसके बाद अब विभाग ने दोबारा री-टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर फाइनल होते ही सीमांकन और पिलर लगाने का काम तेजी से शुरू कराया जाएगा।

हर साल बाढ़ से डूबते हैं खेत और गांव
बरसात के मौसम में रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हर साल तटवर्ती इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। कई गांवों में खेत जलमग्न हो जाते हैं, जबकि कई जगह पानी घरों तक पहुंच जाता है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट में सामने आया है कि नदी किनारे अवैध निर्माण और अतिक्रमण की वजह से पानी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हो रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा और बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने नदी के दोनों किनारों को फ्लड प्लेन जोन घोषित कर सीमांकन का फैसला लिया है।
166 गांव फ्लड प्लेन जोन में शामिल
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी द्वारा कराए गए सर्वे में जिले के 166 गांवों को चिन्हित किया गया है। इनमें सदर तहसील के 52 गांव, आंवला के 43 गांव, फरीदपुर के 28 गांव और मीरगंज तहसील के 43 गांव शामिल हैं। इन गांवों में नदी के दोनों ओर पिलर लगाकर स्पष्ट सीमा तय की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी अवैध निर्माण या कब्जा न हो सके।
प्रशासन का दावा- कम होगा बाढ़ का खतरा
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अमित किशोर ने बताया कि पिलर लगाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखने में मदद मिलेगी। प्रशासन का कहना है कि इस कदम से बाढ़ के खतरे को कम करने के साथ-साथ नदी के प्राकृतिक बहाव को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
ग्रामीणों और कब्जाधारकों में बढ़ी हलचल
प्रशासन की इस कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद नदी किनारे रहने वाले लोगों और कब्जाधारकों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि सीमांकन के बाद प्रशासन अवैध निर्माणों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल बरेली में रामगंगा किनारे ‘लक्ष्मण रेखा’ खींचने की यह योजना चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।
