रामपुर : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खां को दोषी करार देते हुए दो साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
दरअसल यह मामला लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान का है। आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान भोट थाना क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा में आजम खां ने तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। जांच के बाद पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद से यह मामला अदालत में विचाराधीन था।
शनिवार को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने आजम खां को दोषी मानते हुए दो साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया। फैसले के बाद आजम खां की कानूनी परेशानियां और बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
उधर, आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से जुड़े दो पैन कार्ड मामले में भी अदालत में सुनवाई जारी है। इस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट पहले ही दोनों को सात-सात साल की सजा और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुना चुकी है। अब इस फैसले के खिलाफ बचाव पक्ष ने अपील दायर की है, जबकि अभियोजन पक्ष ने सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अलग अपील दाखिल की है।
एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने बहस शुरू की। हालांकि बहस पूरी नहीं हो सकी। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी सीमा राणा ने बताया कि कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मई की तारीख तय की है।
आजम खां और अब्दुल्ला आजम से जुड़े मामलों पर अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। लगातार चल रहे कानूनी मामलों ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता की राजनीतिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
