पीलीभीत : देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया जनगणना 2027 अब पूरी तरह डिजिटल मोड में शुरू हो चुकी है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार आम नागरिकों को सेल्फ एन्यूमरेशन यानी स्व-गणना की सुविधा दी गई है। इसके तहत लोग मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल (https://se.census.gou.in) के माध्यम से खुद अपने परिवार और मकान की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। पीलीभीत जिले में इस नई व्यवस्था की शुरुआत जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने अपने सरकारी आवास पर स्व-गणना कर की। उन्होंने खुद ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी भरकर जिलेवासियों को संदेश दिया कि जनगणना केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी भी है। इस दौरान पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव भी मौजूद रहें और दोनों अधिकारियों ने सेल्फी पॉइंट पर तस्वीरें खिंचवाकर लोगों को इस डिजिटल पहल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि 7 मई से 21 मई तक सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल आम नागरिकों के लिए खुला रहेगा। इस दौरान लोग कुल 34 सवालों के जवाब देकर अपने परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे। इसके बाद प्रशासन की ओर से नियुक्त प्रगणक घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। इसे जनगणना का पहला चरण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का आधार जनगणना के आंकड़े ही होते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास, बिजली, रोजगार और अन्य विकास योजनाओं की रूपरेखा इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाती है। ऐसे में सभी लोगों को अपनी सही और प्रमाणिक जानकारी दर्ज करनी चाहिए, ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।

डीएम ने बताया कि स्व-गणना प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इसके लिए परिवार के मुखिया के नाम से पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। साथ ही परिवार के किसी एक सदस्य का मोबाइल नंबर भी दर्ज करना होगा, जिस पर ओटीपी भेजा जाएगा। ओटीपी सत्यापन के बाद नागरिक आगे की प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर सबसे पहले भाषा का चयन करना होगा, फिर परिवार पंजीकरण, मोबाइल नंबर सत्यापन और स्थान संबंधी जानकारी भरनी होगी। इसके बाद निर्धारित प्रश्नावली को पूरा कर अंतिम सबमिशन करना होगा।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद उसमें किसी भी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा। खासकर परिवार के मुखिया का नाम, मोबाइल नंबर और अन्य मुख्य जानकारियों में बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इसलिए सभी लोगों को बेहद सावधानीपूर्वक जानकारी भरनी होगी। उन्होंने कहा कि कई बार लोग जल्दबाजी में गलत जानकारी दर्ज कर देते हैं, जिससे बाद में परेशानी होती है। इसलिए जानकारी भरते समय सभी दस्तावेज और जरूरी विवरण पहले से तैयार रखें।

प्रशासन के मुताबिक, स्व-गणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्येक परिवार को एक यूनिक सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी प्रदान की जाएगी। यह आईडी आगे होने वाले घर-घर सत्यापन के दौरान गणनाकार को दिखानी होगी। डीएम ने लोगों से अपील की कि इस आईडी को सुरक्षित रखें, क्योंकि आगे की पूरी प्रक्रिया में इसकी आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल जनगणना से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की पारदर्शिता और सटीकता भी बढ़ेगी।
प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और जनगणना प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और प्रभावी बनेगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया समझाने में सहयोग करें। जनगणना 2027 को लेकर जिले में विशेष तैयारियां की जा रही हैं और प्रशासन इसे सफल बनाने के लिए पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से सरकार को योजनाएं बनाने में काफी मदद मिलेगी। इससे डेटा संग्रहण की प्रक्रिया तेज होगी और सरकारी रिकॉर्ड ज्यादा सटीक बन सकेंगे। वहीं आम लोगों को भी सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपनी जानकारी दर्ज करें और इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। क्योंकि सही जनगणना ही बेहतर विकास योजनाओं की मजबूत बुनियाद तैयार करती है।
रिपोर्ट: ऋतिक द्विवेदी
