नई दिल्ली : दक्षिण 24 परगना जिले के फालता में शनिवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना नजदीक है और इलाके में पहले से ही राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के कुछ कार्यकर्ता उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उनके बीच भय का माहौल बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं और यह दबाव बनाया जा रहा है कि वे एक विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में रहें। इसी के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, सड़कों पर उतर आए और उन्होंने निष्पक्ष माहौल की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर कहा कि यदि सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती है तो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इलाके में पुनर्मतदान कराया जाए और केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाई जाए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सीआरपीएफ का एक बख्तरबंद वाहन भी इलाके में लगाया गया है, जो लगातार गश्त कर रहा है।
विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। एक महिला प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर एक टीएमसी नेता द्वारा उन्हें धमकी दी गई है कि यदि चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया तो उनके घरों को जला दिया जाएगा और हिंसा की जाएगी। इस तरह के आरोपों ने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। एक अन्य महिला ने कहा कि उन्होंने पहले भी सत्तारूढ़ पार्टी को वोट दिया था, इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि एक स्थानीय नेता कई लोगों के साथ मोटरसाइकिल पर गांव में आया और लोगों को धमकाया। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों को यह कहकर डराया गया कि अगर उन्होंने विरोध किया तो उन पर हमला किया जा सकता है और उनकी जान को खतरा है। इन आरोपों के बाद इलाके में तनाव और भी बढ़ गया, हालांकि प्रशासन लगातार स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।
इस पूरे मामले पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने कहा कि हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं और किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगें सामने आई हैं, जिन्हें सुना गया है। साथ ही धमकी देने के एक मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहट पश्चिम और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्रों के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान भी कराया जा रहा है। यह पुनर्मतदान चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कराया जा रहा है। दोपहर दो बजे तक मगराहट पश्चिम में 56.33 प्रतिशत और डायमंड हार्बर में 54.9 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि कुल औसत मतदान प्रतिशत 55.57 रहा।
इसी बीच एक और विवाद सामने आया है, जिसने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। ईवीएम स्ट्रांग रूम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। टीएमसी ने खिदिरपुर स्थित अनुशीलन केंद्र में तैनात एक निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि डाक मतपत्रों के लिफाफों की अनधिकृत छंटाई की गई है, जो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। यह केंद्र ईवीएम रखने के लिए स्ट्रांग रूम के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा का कहना है कि एक स्ट्रांग रूम को बिना अनुमति के खोला गया, जो कि चुनाव नियमों का उल्लंघन है। इस मामले में जांच शुरू कर दी गई है और खबर है कि कम से कम छह अधिकारियों को निलंबित किया गया है। हालांकि प्रशासन ने इस पर अभी विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, लेकिन जांच जारी होने की पुष्टि की गई है।
इन सभी घटनाओं के बीच प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि चार मई को होने वाली मतगणना शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो। इसके लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
कुल मिलाकर, दक्षिण 24 परगना का यह मामला चुनावी माहौल में बढ़ते तनाव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का एक उदाहरण बनकर सामने आया है। अब सबकी नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी है कि वे किस तरह से स्थिति को संभालते हैं और क्या सच्चाई सामने आती है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ये आरोप कितने सही हैं और चुनावी प्रक्रिया पर इनका क्या असर पड़ता है।
