अयोध्या : अयोध्या से आज एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण सामने आया, जहां राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। इस खास अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इसे अपने जीवन का कृतार्थ करने वाला पल बताया। राष्ट्रपति ने सभी देशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अयोध्या में उपस्थित होना उनके लिए गर्व और आस्था का विषय है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद देश को यह ऐतिहासिक सौभाग्य प्राप्त हुआ है। राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा और मंदिर का ध्वजारोहण हमारे इतिहास की स्वर्णिम तिथियां हैं। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें श्रीराम यंत्र की स्थापना का अवसर मिला, जिसे वह प्रभु श्रीराम की कृपा का प्रतीक मानती हैं। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं दीं।
राज्यपाल ने कहा कि प्रभु श्रीराम का मंदिर अब केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि राष्ट्र मंदिर बन चुका है। यह करोड़ों रामभक्तों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि आज अयोध्या वैश्विक चेतना का केंद्र बनती जा रही है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अशांति का माहौल है, तब अयोध्या में श्रीराम यंत्र की स्थापना का यह आयोजन शांति और आनंद का संदेश दे रहा है। यही रामराज्य की अनुभूति है। उन्होंने कहा कि भारत साधु-संतों की भूमि है और यही हमारी सबसे बड़ी पहचान है। राम मंदिर आज नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अब देश के युवा नववर्ष की शुरुआत मंदिरों में दर्शन कर करते हैं, जो हमारे सांस्कृतिक जागरण का संकेत है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया और सभी रामभक्तों को नवरात्र की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ ही राम मंदिर अब पूर्ण रूप से परिपूर्ण हो गया है। यह 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। इस ऐतिहासिक आयोजन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने भी हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ ही प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण पूर्ण हो गया है। यह उन लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था और समर्पण का परिणाम है, जिन्होंने इस आंदोलन को वर्षों तक जीवित रखा। कार्यक्रम में उन लोगों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था, जो वर्ष 1984 से ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए थे।
कुल मिलाकर, अयोध्या में आज का दिन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक बन गया, जहां देश के शीर्ष नेतृत्व और हजारों श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनकर इसे यादगार बना दिया।
