नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इसी बीच कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच जारी टकराव के बीच हालात और ज्यादा संवेदनशील होते नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में भारत, इराक, लेबनान और फारस की खाड़ी से जुड़ी कई अहम खबरें सामने आई हैं।
सबसे पहले बात भारत से जुड़ी एक बड़ी खबर की। भारत ने ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस लवान के गैर-जरूरी क्रू सदस्यों को वापस उनके देश भेज दिया है। यह युद्धपोत 4 मार्च से केरल के कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक जहाज में कुल 183 क्रू सदस्य मौजूद थे। इनमें से 50 से ज्यादा जरूरी क्रू सदस्य अभी भी जहाज पर ही तैनात हैं, जबकि बाकी गैर-जरूरी क्रू को भारत से रवाना कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि इन क्रू सदस्यों को एक तुर्की एयरलाइन की फ्लाइट के जरिए उनके देश भेजा गया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भारतीय अधिकारियों ने अभी कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसी बीच इराक की राजधानी बगदाद से भी एक बड़ी खबर सामने आई है। बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर के अंदर एक मिसाइल आकर गिरी है। इस हमले में दूतावास परिसर के हेलिपैड को निशाना बनाया गया। इस घटना की जानकारी इराक के दो सुरक्षा अधिकारियों ने दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार सुबह दूतावास परिसर के ऊपर घना धुआं उठता हुआ देखा गया। हालांकि इस हमले को लेकर अभी तक अमेरिकी दूतावास की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। गौरतलब है कि बगदाद में मौजूद यह अमेरिकी दूतावास दुनिया के सबसे बड़े अमेरिकी राजनयिक परिसरों में से एक माना जाता है।
इससे पहले भी कई बार इस परिसर को रॉकेट और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया जा चुका है। अक्सर इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों पर आरोप लगाया जाता रहा है, हालांकि हर बार इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाती। वहीं लेबनान से भी एक दुखद खबर सामने आई है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस्राइल द्वारा किए गए एक हवाई हमले में दो स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो गई है, जबकि पांच अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि यह हमला एक संयुक्त मेडिकल पॉइंट पर हुआ, जिसे इस्लामिक हेल्थ अथॉरिटी और इस्लामिक मैसेज स्काउट्स मिलकर संचालित कर रहे थे। लेबनान सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा देना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्पष्ट रूप से तय है, लेकिन इसके बावजूद पैरामेडिक्स को निशाना बनाना बेहद खतरनाक और अस्वीकार्य कदम है।
इधर ईरान ने भी अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। ईरान के खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता एब्राहीम जोल्फाघरी ने टीवी पर संदेश जारी करते हुए बताया कि अमेरिका और इस्राइल हर उस खून की कीमत चुकाएंगे जो अन्याय के तहत बहाया गया है।उन्होंने कहा कि ईरान ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” की 46वीं लहर शुरू कर दी है। जोल्फाघरी के मुताबिक ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई दुश्मन ड्रोन को मार गिराया है। उन्होंने दावा किया कि फिरोजाबाद और बंदर अब्बास में दो MQ-9 ड्रोन और तब्रीज के आसमान में एक अन्य ड्रोन को नष्ट किया गया।
ईरान का यह भी दावा है कि अब तक कुल 112 ड्रोन और लड़ाकू विमान गिराए जा चुके हैं, जिनमें निगरानी ड्रोन, लड़ाकू ड्रोन और सुसाइड ड्रोन भी शामिल हैं। इस बीच फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के खार्ग द्वीप से भी विस्फोट और धुएं की खबर सामने आई है। ईरानी मीडिया के मुताबिक द्वीप पर हमलों के दौरान 15 से ज्यादा धमाकों की आवाजें सुनी गईं और आसमान में घना धुआं उठता हुआ देखा गया।
हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि वहां की सैन्य व्यवस्था अभी भी पूरी तरह सक्रिय है और किसी बड़े सैन्य ठिकाने को नुकसान नहीं पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार हमलों के करीब एक घंटे के भीतर ही द्वीप की सुरक्षा और रक्षा प्रणाली दोबारा सक्रिय हो गई। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक इन हमलों में तेल से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान नहीं पहुंचा है और ईरानी सेना की गतिविधियां वहां सामान्य रूप से जारी हैं। फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाता है।
