फतेहपुर : जिले में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। धाता विकास खंड के ऐमापुर–रतनपुर मार्ग पर बन रही सड़क की शिकायत मिलने पर भाजपा विधायक कृष्णा पासवान खुद मौके पर पहुंच गईं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माणाधीन सड़क को फावड़े से खोदकर उसकी मोटाई और गुणवत्ता की जांच की। यह सड़क कुल 4 किलोमीटर लंबी बनाई जानी है, जिसमें से अभी करीब 500 मीटर का निर्माण कार्य पूरा हुआ है। इस परियोजना की लागत लगभग 37 लाख 99 हजार रुपये बताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने विधायक से शिकायत की थी कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है और मानकों की अनदेखी की जा रही है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधायक 21 फरवरी को मौके पर पहुंचीं और बिना किसी औपचारिकता के खुद जांच शुरू कर दी।
जांच में उजागर हुई खामियां, अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकार
निरीक्षण के दौरान विधायक कृष्णा पासवान ने सड़क की खुदाई कर उसकी परतों को देखा। जांच में प्रथम दृष्टया निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। गुणवत्ता में कमी देखकर विधायक ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों पर नाराजगी जताई और मौके पर मौजूद अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जनता के पैसे से बनने वाली सड़कों में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” विधायक ने जेई, एई, एक्सईएन सहित विभाग के उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही और कहा कि सोमवार को इस संबंध में लिखित पत्र भी भेजा जाएगा। विधायक ने निर्देश दिए कि सड़क का निर्माण पूरी गुणवत्ता, निर्धारित मोटाई और मानकों के अनुसार ही कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को लंबे समय तक इसका लाभ मिल सके।
वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
निरीक्षण के दौरान बनाई गई फोटो और वीडियो विधायक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए, जो तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में विधायक फावड़े से सड़क खोदते हुए नजर आ रही हैं। इस पर सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक यूजर ने टिप्पणी की, “अब ऐसा करने से कोई फायदा नहीं, 2027 में जनता बटन दबाएगी।” वहीं, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता प्रतीक अग्रवाल का कहना है कि शिकायत मिली है और पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विधायक कृष्णा पासवान ने चेतावनी दी है कि यदि आगे भी अनियमितता पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह मामला एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है।
