बरेली: शादी तय होने के बाद रुपये वापस न करने के विवाद में हुई हत्या के एक पुराने मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। करीब 16 साल पुराने इस मामले में फरार चल रहे आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास सहित अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई गई है।
शादी तय, रुपये लिए और फिर इंकार
वादी के अनुसार, उन्होंने अपनी बेटी की शादी ग्राम रामनगर पूर्व देवी नारायण गौटिया, थाना बिथरी चैनपुर निवासी श्याम सुंदर उर्फ चिंटू से तय की थी। रोका के समय उन्होंने 55 हजार रुपये दिए थे। कुछ समय बाद लड़के के पिता नरेन्द्रपाल ने शादी से इंकार कर दिया और रुपये भी वापस नहीं किए। इसके बाद वादी ने अपनी बेटी की शादी कहीं और कर दी।
पैसे मांगने पर भड़का विवाद
27 मई 2010 को जब वादी ने दुकान के सामने नरेन्द्रपाल से अपने रुपये वापस मांगे, तो उसने मना कर दिया। आरोप है कि इसी रंजिश में कुछ समय बाद नरेन्द्रपाल, उसका भाई धर्मपाल, श्याम सुंदर उर्फ चिंटू और रुकम सिंह हथियारों के साथ वादी के घर पहुंचे और हमला कर दिया। इस दौरान वादी के भतीजे को गोली मार दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई।
हत्या के मामले में दर्ज हुआ मुकदमा
इस घटना के बाद थाना बारादरी में दंगा, हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए गए।
पहले दो आरोपियों को मिल चुकी थी सजा
इस केस में 3 जनवरी 2026 को अदालत ने रुकम सिंह और श्याम सुंदर उर्फ चिंटू को दोषी ठहराते हुए हत्या के आरोप में आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। वहीं तीन आरोपी धर्मपाल, नरेन्द्रपाल सिंह और गोपी उस समय फरार हो गए थे।
फरार आरोपियों को भी उम्रकैद
पुलिस ने बाद में फरार तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। आज अदालत ने तीनों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही दंगा, हथियारों से लैस होकर हमला करने और घर में घुसकर मारपीट करने की धाराओं में भी अलग-अलग अवधि की सजा और अर्थदंड लगाया गया। अदालत ने साफ किया है कि जुर्माना न देने पर सभी दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
