2027 चुनाव में सीएम बनाने का संकल्प:, सपा मजदूर सभा की लखनऊ बैठक में जुटे राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारी
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के लखनऊ स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में मंगलवार को समाजवादी मजदूर सभा के राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पदाधिकारियों और प्रमुख कार्यकर्ताओं की अहम बैठक हुई। इस बैठक में 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लक्ष्य बनाते हुए सभी कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि पूरी ताकत के साथ भाजपा की जनविरोधी नीतियों को पराजित कर अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
मजदूरों के हितों की उपेक्षा कर रही है भाजपा सरकार: अखिलेश यादव

इस बैठक को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में मजदूरों का भारी शोषण हो रहा है। श्रमिक वर्ग रोटी-रोज़गार के लिए दर-दर भटक रहा है। उन्होंने कहा, “भाजपा पूंजीपतियों की सरकार है। हम चाहते हैं कि उद्योग बंद न हों लेकिन श्रमिकों के स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा हर हाल में हो।”उन्होंने याद दिलाया कि कोविड काल में समाजवादी पार्टी ही थी, जिसने मजदूरों के हित में काम किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में समाजवादी सरकार ने न्यूनतम श्रम बोर्ड का गठन किया था, साइकिलें दी गईं और मानदेय की व्यवस्था की गई थी। भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद सभी श्रमिक-कल्याण योजनाएं बंद कर दी हैं।
इतिहास से सबक लें, 2027 की लड़ाई सबसे अहम

सपा प्रमुख ने कहा कि श्रमिक आंदोलन का एक लंबा इतिहास रहा है। जिसकी शुरुआत 1886 में शिकागो गोलीकांड और 1989 में 8 घंटे कार्य दिवस की कानूनी मान्यता से हुई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग 8.5 करोड़ और पूरे देश में 30 करोड़ श्रमिक रजिस्टर्ड हैं, फिर भी उनके अधिकारों की उपेक्षा की जा रही है। “2027 की लड़ाई सामाजिक न्याय की बहाली की लड़ाई है,” सपा की सरकार आने पर बहाल होंगी योजनाएं, मिलेगा सम्मान।उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाजवादी सरकार बनने पर श्रमिकों, किसानों, नौजवानों, व्यापारियों, महिलाओं और शिक्षकों को उनके हक और सम्मान के साथ जीने का अवसर मिलेगा।
मजदूरों ने गिनाई समस्याएं

समाजवादी मजदूर सभा ने इस अवसर पर कई प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखीं। उन्होंने सभी रिक्त पदों पर एकमुश्त भर्ती, मनरेगा को मजबूत करने और शहरी रोजगार गारंटी कानून का निर्माण, न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित करना, पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली, एमएसपी की कानूनी गारंटी, श्रमिक यूनियन बनाने के अधिकार की सुरक्षा, निजीकरण पर रोक और चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाना,झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को बुनियादी सुविधाएं देने की मांग, आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। इस दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। इसमें शिवपाल सिंह यादव (राष्ट्रीय महासचिव), लाल बिहारी यादव (नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद), राजेन्द्र चौधरी, श्यामलाल पाल, राहुल निगम वारसी (राष्ट्रीय अध्यक्ष – समाजवादी मजदूर सभा), धनिक लाल, डॉ. मानसिंह यादव एमएलसी, शशांक यादव और सतीश निगम (पूर्व विधायक) शामिल रहे।
