जेसीबी खुदाई में मिले पुराने चांदी के सिक्के, पुरातत्व विभाग पर उठे सवाल
बदायूं : अलापुर थाना क्षेत्र के आसपुर गांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां तालाब पाटने के लिए की जा रही जेसीबी खुदाई के दौरान बेहद पुराने चांदी के सिक्के निकलने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को गांव के बाहर स्थित एक पुराने टीले के पास जेसीबी से मिट्टी की खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान जब जेसीबी से टीले को गिराया गया, तो मिट्टी के साथ चांदी के सिक्के बाहर आ गए।
सिक्के दिखाई देते ही मौके पर मौजूद ग्रामीणों और बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। जिस किसी के हाथ जितने सिक्के लगे, वह उन्हें लेकर भाग निकला। ग्रामीणों का दावा है कि करीब दो सौ के आसपास चांदी के सिक्के मिले हैं, जिन्हें तुगलक कालीन बताया जा रहा है। सिक्कों के अचानक निकलने की खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सिक्के निकलते देख जेसीबी चालक भी मशीन से उतर आया और ग्रामीणों से सिक्के लेने को लेकर उसकी कहासुनी हो गई। आरोप है कि इसी दौरान जेसीबी चालक और कुछ ग्रामीणों के बीच मारपीट भी हुई। हालांकि बाद में बिना पुलिस को सूचना दिए ही मामला आपसी समझौते से रफा-दफा कर लिया गया। न तो मारपीट की सूचना पुलिस को दी गई और न ही सिक्के मिलने की जानकारी आधिकारिक रूप से दर्ज कराई गई।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के बाहर स्थित यह टीला बेहद पुराना है और वर्षों से बच्चे और गांव के लोग यहां खेलते आ रहे हैं। पहले भी कई बार लोगों को आशंका रही है कि यह टीला किसी पुराने ऐतिहासिक स्थल से जुड़ा हो सकता है, लेकिन कभी इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अब जब खुदाई के दौरान चांदी के पुराने सिक्के मिलने की बात सामने आई है, तो गांव में चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और पुरातत्व विभाग इस मामले को गंभीरता से ले, तो यहां विधिवत खुदाई कराई जा सकती है। उनका मानना है कि इस टीले में और भी ऐतिहासिक धरोहर दबे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का यह भी कहना है कि इस तरह की खुदाई बिना निगरानी के कराना ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचा सकता है।
वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन इस मामले से अनभिज्ञ बना हुआ है। सीओ दातागंज केके तिवारी ने बताया कि पुलिस को इस तरह की किसी घटना या चांदी के सिक्के मिलने की कोई सूचना नहीं दी गई है। न तो मारपीट की जानकारी मिली है और न ही खनन के दौरान किसी पुरातात्विक वस्तु के मिलने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। फिलहाल यह पूरा मामला चर्चाओं में बना हुआ है। अगर सिक्के वास्तव में तुगलक कालीन हैं, तो यह ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस दावे को गंभीरता से लेता है या यह मामला केवल गांव की चर्चाओं तक ही सीमित रह जाता है।
