नई दिल्ली : एम्स दिल्ली ने चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बीते 13 महीनों में एम्स में एक हजार रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की गई हैं। एम्स प्रशासन का दावा है कि देश में यह पहली बार हुआ है जब किसी सरकारी चिकित्सा संस्थान ने रोबोट की मदद से जनरल सर्जरी को इतने बड़े स्तर पर अंजाम दिया है। खास बात यह है कि इन सभी सर्जरी को मरीजों के लिए पूरी तरह निशुल्क रखा गया।
एम्स में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत 5 नवंबर 2024 को सर्जिकल डिसिप्लिन्स विभाग के सर्जिकल ब्लॉक में दा विंची रोबोट की मदद से की गई थी। इसके बाद से लगातार रोबोटिक तकनीक का उपयोग कर जटिल सर्जरी की जाती रही और महज 13 महीनों में एक हजार सर्जरी का आंकड़ा पार कर लिया गया। रोबोट की मदद से की जाने वाली सर्जरी में सटीकता काफी बढ़ जाती है। इसमें चीर-फाड़ बेहद कम होती है और खून का रिसाव भी न के बराबर रहता है। इसके चलते मरीज जल्दी स्वस्थ होता है और उसे कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। एम्स में इस समय चौथी पीढ़ी के कुल आठ रोबोट उपलब्ध हैं, जिनमें से दो रोबोट डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने के लिए उपयोग में लाए जा रहे हैं।
सर्जिकल डिसिप्लिन्स विभाग के प्रमुख डॉ. सुनील चंबर ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी तेजी से होती है। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को थ्री-डायमेंशनल विजन मिलता है, जिससे बेहद कठिन सर्जरी भी अधिक सुरक्षित और आसान तरीके से की जा सकती है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक खास तौर पर उन मामलों में उपयोगी है, जहां ओपन सर्जरी करना चुनौतीपूर्ण होता है। डॉ. चंबर ने यह भी बताया कि सामान्य रूप से गॉल ब्लैडर की ओपन सर्जरी कराने वाले मरीज को 5 से 7 दिन अस्पताल में रहना पड़ता है। वहीं लेप्रोस्कोपी से सर्जरी कराने पर मरीज को दो दिन में छुट्टी मिल जाती है, जबकि रोबोटिक सर्जरी के जरिए ऑपरेशन होने पर मरीज को सिर्फ एक दिन में ही डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
एम्स प्रशासन का कहना है कि देश के किसी अन्य संस्थान में अब तक इतनी बड़ी संख्या में रोबोटिक सर्जरी नहीं की गई हैं। यह उपलब्धि न केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि आम मरीजों के लिए अत्याधुनिक इलाज को सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
