नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी की मांग की है। कूच बिहार की एक रैली में उन्होंने तीखे अंदाज़ में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने उपन्यासकार और ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को ‘बंकिम दा’ कहकर संबोधित किया, जो बंगाल के एक महान सांस्कृतिक प्रतीक का अनादर है। ममता ने कहा कि जब देश आज़ाद भी नहीं हुआ था, तब प्रधानमंत्री का जन्म नहीं हुआ था, लेकिन आज वे उन हस्तियों को ऐसे साधारण तरीके से पुकार रहे हैं, जिनके कंधों पर भारत की सांस्कृतिक विरासत टिकी है। उन्होंने साफ कहा प्रधानमंत्री को इसके लिए राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।
इसी रैली में ममता ने केंद्र सरकार पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार को केंद्र से किसी भी वित्तीय सहायता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र के नोटिस और निर्देशों की कोई अहमियत नहीं है, क्योंकि बंगाल अपने विकास कार्य खुद करने में सक्षम है। दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में राज्य को नोटिस भेजकर तिमाही लेबर बजट का ब्यौरा मांगा था और 6 दिसंबर तक जवाब देने को कहा था। इस पर ममता ने कहा,“आपके नोटिस की कोई अहमियत नहीं। हम अपनी योजनाएं खुद चला रहे हैं।”
पूरा विवाद सोमवार को उस समय शुरू हुआ जब लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा चल रही थी। चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का जिक्र करते हुए उन्हें ‘बंकिम दा’ कहा। इस पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने तुरंत आपत्ति जताई और सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री उन्हें ‘बंकिम बाबू’ कहें। पीएम मोदी ने उनकी भावना का सम्मान करते हुए तत्काल कहा “मैं बंकिम बाबू कहूंगा।” और हल्के अंदाज़ में पूछा कि क्या वे रॉय को भी ‘दादा’ कह सकते हैं। हालांकि यह बात आई-गई नहीं हुई और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है।
आज टीएमसी सांसदों ने संसद के सेंट्रल हॉल में मौन प्रदर्शन किया। वे रवींद्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की तस्वीरें हाथ में लिए शांत बैठे रहे। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री ने बंगाल की संस्कृति और साहित्य की दो महान हस्तियों का अपमान किया है। राज्यसभा में टीएमसी की उपनेता सागरिका घोष ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय बंगाल पुनर्जागरण के महान स्तंभ थे और ‘आनंदमठ’ जैसी कृति से ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ आया है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री ने नाम का गलत उच्चारण कर उनकी विरासत को कमतर दिखाने की कोशिश की है।
रैली में ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि यदि भाजपा बंगाल में सत्ता में आती है, तो वह राज्य की भाषा, संस्कृति और विरासत को नुकसान पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होते ही अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी और उसके तुरंत बाद चुनाव घोषित होने की संभावना है, ताकि इस पर कोई अदालत में चुनौती न दे सके।
