वंदे मातरम् केवल भावना नहीं, राष्ट्रभक्ति और साहस का प्रतीक: प्रियंका गांधी
नई दिल्ली: केरल की वायनाड सीट से चुनी गई कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् पर चल रही बहस में हिस्सा लिया और इस विषय पर सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की आजादी की लड़ाई, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि यह गीत ब्रिटिश साम्राज्य को झुकने पर मजबूर करने वाली ताकत रखता था और इसे राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान वाला माना जाता है।
प्रियंका गांधी ने बहस के दौरान स्पष्ट किया कि संसद में वंदे मातरम् पर बहस कराई जा रही है क्योंकि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं। उन्होंने कहा, “हम देश के लिए हैं, आप चुनाव के लिए हैं।” प्रियंका ने कहा कि यह गीत 150 सालों से देश की आत्मा का हिस्सा रहा है और आज़ाद भारत में 75 साल से जनता के दिलों में बसता आया है। उन्होंने सवाल किया कि आज सरकार इस पर बहस कर क्या साबित करना चाहती है और सत्ता पक्ष को जनता की जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए, न कि ऐसे मुद्दों पर विवाद खड़ा करना चाहिए।
सांसद ने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि 1930 के दशक में जब सांप्रदायिक राजनीति उभरी, तब यह गीत विवादित होने लगा। उन्होंने 1937 के कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन का जिक्र किया, जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इस गीत को प्रमुखता दी। प्रियंका ने कहा कि नेहरू को लिखे गए नेताजी के पत्र का उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में नहीं किया।
प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री जितने साल से सत्ता में हैं, उतने साल पंडित नेहरू आज़ादी की लड़ाई में जेल में रहे। उन्होंने याद दिलाया कि नेहरू ने 12 साल जेल में बिताने के बाद 17 साल तक देश का नेतृत्व किया। प्रियंका ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बार-बार इतिहास में उलझकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है और नेहरू पर बार-बार निशाना साधकर देशभक्ति के मूल मुद्दों से ध्यान हटाया जा रहा है।
प्रियंका गांधी ने वंदे मातरम् की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह गीत देश के लिए बलिदान की भावना जगाता है। उन्होंने बताया कि 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे सार्वजनिक रूप से गाया था और 1905 में इस गीत के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में कदम रखा गया। उन्होंने यह भी बताया कि नेताजी ने 1937 में नेहरू को जो पत्र लिखा था, उसके जरिए उन्हें चेतावनी दी गई थी कि इस गीत की पृष्ठभूमि से मुसलमानों में असंतोष हो सकता है, लेकिन यह ऐतिहासिक सच्चाई पीएम मोदी के भाषण में शामिल नहीं की गई।
प्रियंका गांधी ने कहा कि वंदे मातरम् केवल भावनाओं का गीत नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति, साहस और आज़ादी के लिए संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बेरोजगारी, गरीबी, प्रदूषण जैसे असली मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं हो रही और संसद का समय देश के विकास और लोगों की भलाई के काम क्यों नहीं आ रहा।
सांसद ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि मौजूदा प्रधानमंत्री पहले जैसे नहीं रहे और उनकी नीतियां देश को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने जनता और सांसदों से अपील की कि वे इतिहास की सच्चाई को समझें और देशभक्ति की भावना को बनाए रखें। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि वंदे मातरम् हर भारतीय के दिल में देशभक्ति और बलिदान की भावना जगाता है, और इसे लेकर विवाद खड़ा करना देश और संविधान की भावना के खिलाफ है।
