फर्जी शिकायत करने वाली महिला समेत कई लोगों पर कार्रवाई तय
एसपी सिटी मानुष पारीक ने वीडियो जारी कर दी जानकारी, महिला ने स्कूल में राष्ट्रगान पढ़ने पर विरोध का लगाया था झूठा आरोप
बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली में राष्ट्रगान के विरोध को लेकर उठी सनसनी अब फर्जी निकली है। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रगान के विरोध जैसी कोई घटना नहीं हुई, बल्कि यह एक आपसी रंजिश और ज़मीन विवाद का मामला था। जिसे राष्ट्रभक्ति के चोले में लपेट कर उछालने की कोशिश की गई। इस झूठे आरोप को लेकर स्कूल संचालिका और उससे जुड़े अन्य लोगों पर अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जानें क्या था मामला?
शहर के किला थाना क्षेत्र स्थित एक निजी स्कूल की संचालिका सबीना ने एक दिन पहले यानी 29 अप्रैल को एसएसपी कार्यालय पहुंचकर यह आरोप लगाया था। उनका आरोप था कि स्कूल में जब बच्चों द्वारा राष्ट्रगान गाया जाता है, तो आसपास के कुछ लोग इसका विरोध करते हैं और स्कूल आकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं। उन्होंने दावा किया था कि स्कूल में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के बच्चे पढ़ते हैं, और ‘जन गण मन’ की धुन के साथ प्रतिदिन राष्ट्रगान कराया जाता है। उनके अनुसार, कुछ दबंग लोग स्कूल आकर शिक्षकों के सामने आपत्तिजनक व्यवहार करते हैं और राष्ट्रगान का अपमान करते हैं। उन्होंने अपने साथ मौजूद महिलाओं और संगठन कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की थी।
जांच में यह सच्चाई आई सामने
मामले की गंभीरता को देखकर एसपी सिटी मानुष पारीक ने एक जांच टीम गठित की और तथ्यों की गहन पड़ताल शुरू की। मौके की जांच, वीडियो फुटेज की समीक्षा और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने खुलासा किया कि यह मामला दो पक्षों के बीच निजी प्लॉट विवाद से जुड़ा हुआ है। जांच में पाया गया कि स्कूल संचालिका सबीना अपने पड़ोसी मुस्तफा की ज़मीन (प्लॉट) खरीदना चाहती थीं। मगर, मुस्तफा नहीं बेच रहे थे। इसी को लेकर विवाद चल रहा था। जब पड़ोसी ने प्लॉट देने से इनकार किया, तो स्कूल संचालिका ने झूठे आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने की साजिश रची और इसे राष्ट्रगान विरोध से जोड़ने का प्रयास किया।
जानें क्या बोले एसपी सिटी
एसपी सिटी मानुष पारीक ने इस मामले में स्पष्ट किया कि”यह राष्ट्रगान के विरोध का मामला नहीं है। जांच में यह झूठा और भ्रामक पाया गया है। शिकायतकर्ता महिला ने निजी रंजिश के चलते यह आरोप गढ़ा था। उनके खिलाफ और इस साजिश में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी समाज में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की इजाजत नहीं है।”
दोनों पक्षों को थाने बुलाकर की गई पूछताछ
किला थाना पुलिस ने भी मौके पर जाकर की गई जांच में भी यह स्पष्ट हुआ कि यह मामला एक ही समुदाय के दो गुटों के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी का है। जिसमें शिक्षा या राष्ट्रगान का कोई सीधा संबंध नहीं था। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर पूछताछ की और स्थिति स्पष्ट की।
फर्जी आरोप गंभीर अपराध
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फर्जी आरोप लगाकर किसी व्यक्ति या समुदाय की छवि को धूमिल करना, विशेष रूप से देशभक्ति जैसे संवेदनशील मुद्दे पर, न केवल नैतिक रूप से गलत है बल्कि यह एक दंडनीय अपराध भी है। इस प्रकार की घटनाएं सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
