बरेली/हापुड़ : यूपी के हापुड़ में जिला बेसिक शिक्षा विभाग के कनिष्ठ सहायक दीपेंद्र शर्मा और संविदा कर्मी निखिल शर्मा को एंटी करप्शन टीम ने 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते दबोच लिया। दोनों आरोपी निजी स्कूल के प्रधानाचार्य से रिश्वत लेने कार्यालय के बाहर स्थित चाय के खोखे पर आए थे। यहां टीम ने उन्हें घेराबंदी कर गिरफ्तार किया।
शिकायत से खुला खेल, 19 अप्रैल का निरीक्षण और रिश्वत की मांग
हापुड़ के पिलखुवा क्षेत्र के भविष्य पब्लिक स्कूल, शिवालिक ग्रीन के प्रधानाचार्य सुकुमार पहाड़ी ने कुछ दिन पहले शिकायत की थी कि 19 अप्रैल को बीएसए रितु तोमर और कनिष्ठ सहायक दीपेंद्र शर्मा ने स्कूल का निरीक्षण किया। उस दौरान शिकायत में आरोप लगाया गया। स्कूल की मान्यता की समयावधि समाप्त हो चुकी थी। पर्याप्त पात्र शिक्षक नहीं रखे गए। बिना मान्यता दसवीं तक की कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। परंतु, स्कूल को मांगलिक नोटिस की जगह झूठे आरोपों के तहत नोटिस भेजने की बात कहते हुए नोटिस को दस दिन तक आश्रित रखा गया। इसके बाद विभागीय कर्मचारियों ने प्रधानाचार्य से करोड़ों रुपये की रिश्वत की दिमांड शुरू कर दी, और तरह-तरह की धमकियां देने लगे।
ट्रैप की योजना और दबिश
शिकायत मिलने पर मेरठ एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक दुर्गेश कुमार ने मामले की जांच शुरू की।टीम ने प्रधानाचार्य को 70 हजार रुपये रिश्वत देने की तैयारी कराने के निर्देश दिए। सुकुमार पहाड़ी 70 हजार रुपये चाय की दुकान के पास लेकर पहुंचे। इसी दौरान जैसे ही दीपेंद्र और निखिल रुपये लेने के लिए चाय बेचने के खोखे पर आए, मौके पर मौजूद एंटी करप्शन टीम ने दोनों को दबोच लिया।
पुलिसिया कार्रवाई और मेडिकल जांच
आरोपियों को देहात थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए और CHC में मेडिकल जांच कराया गया। निरीक्षक दुर्गेश कुमार ने बताया कि अब दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत धारा 7 (सुविधा शुल्क लेने पर) और IPC की धाराएँ 161/171 (प्रशासनिक अनियमितता) के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। ट्रैप टीम प्रभारी सुब्रत शुक्ला ने कहा, “दुर्व्यवहार करने वाले विभागीय कर्मचारियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।”
निजी स्कूल संचालकों की प्रतिक्रियाएँ
भविष्य पब्लिक स्कूल जैसी ग्रामीण चैरिटेबल संस्था को संचालित कर रहीं वीना चौहान ने कहा, “गरीब बच्चों की शिक्षा पर हम खुद खर्च उठाते हैं; ऐसे में रिश्वत की मांग बेहद निराशाजनक है।” अन्य निजी स्कूल संचालक भी शिकायत करते हैं कि विभागीय अनियमितताएँ और रिश्वतखोरी से शिक्षा का वातावरण प्रभावित हो रहा है।
विभागीय अनियमितताओं पर सवाल
विश्लेषकों का कहना है कि बीएसए के निर्देश और नोटिस जारी करने में जिस तरह की गफलत हुई। वह दिखाती है कि विभाग में नोटिसों की मॉनिटरिंग और अनुपालन की समीक्षा नहीं हो रही। समय पर नोटिस न भेजने और संशोधित नोटिस भेजने के पीछे कहीं रिश्वतखोरी की साज़िश तो नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
