बरेली : यूपी के बरेली जिले में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। यहां जनसेवा केंद्र की आड़ में आधार कार्ड सहित सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी की जा रही थी। पुलिस ने भोजीपुरा क्षेत्र में स्थित अजहरी जनसेवा केंद्र पर छापा मारकर इस अंतरराज्यीय फर्जी दस्तावेज गिरोह का खुलासा किया है और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, दो दिन पहले लखनऊ की आर्मी इंटेलीजेंस और बरेली एसओजी ने सीबीगंज थाना क्षेत्र के महेशपुर से एक भाजपा नेता को हिरासत में लिया था। उसके यहां से भी बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र और मोहरें बरामद हुई थीं।
एक साल से बना रहे थे फर्जी आधार, पैन और प्रमाणपत्र
बरेली देहात के भोजीपुरा थाना क्षेत्र के पचदौरा दोहरिया गांव में संचालित इस केंद्र पर मोहम्मद फहीम उर्फ गुड्डू और जियाउल मुस्तफा पिछले एक साल से आधार कार्ड, पैन कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, मार्कशीट और अन्य दस्तावेज फर्जी तरीके से बना रहे थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने इन नकली दस्तावेजों के जरिए हर महीने लाखों रुपये की अवैध कमाई की। शुक्रवार को छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और उपकरण बरामद किए गए।
बरामद सामग्री में यह शामिल
पुलिस ने एक लैपटॉप, एक मॉनिटर, एक सीपीयू, दो प्रिंटर स्कैनर, एक पीवीसी कार्ड मशीन, एक कैमरा, एक वेब कैमरा, कैमरा स्टैंड, एक फिंगरप्रिंट मशीन, दो थंब स्कैनर, तीन मोबाइल फोन, 20 जाली जन्म प्रमाणपत्र, 15 फर्जी निवास प्रमाणपत्र, 5 आय प्रमाणपत्र, 15 फर्जी स्टांप पेपर, 1 बिहार बोर्ड और 1 यूपी बोर्ड की 10वीं की जाली मार्कशीट, 20 जाली आधार कार्ड, 2 फर्जी पैन कार्ड, 44 ब्लैक प्लास्टिक आधार कार्ड, 1 वोटर आईडी आदि मिले हैं।
जानें क्या बोले एसपी
एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा ने जानकारी दी कि मोहम्मद फहीम पहले बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में आधार कार्ड बनाने का कार्य करता था। 2012 से 2019 और 2023 से 2024 तक यह कार्यरत रहा। उसे आधार अपडेट पर 13 रूपये और नए कार्ड पर 18 रूपये का कमीशन मिलता था। लेकिन जब इसने सौ रुपये की वसूली शुरू की तो UIDAI में शिकायत होने पर उसे हटा दिया गया। इसके बाद उसने जनसेवा केंद्र खोल लिया और जियाउल मुस्तफा को साथ जोड़कर यह फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया।
अपराध का खुलासा और कानूनी कार्रवाई
पुलिस अब इस मामले की तह तक जाकर गिरोह के अन्य सदस्यों और लिंक को खंगाल रही है। प्रारंभिक जांच में यह एक अंतरराज्यीय फर्जी दस्तावेज रैकेट प्रतीत हो रहा है, जो कि प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती दे रहा था।
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