लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की क़ानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया सेल पर सांसद रामजी लाल सुमन का एक वीडियो जारी किया है। उन्होंने लिखा है कि पीडीए के सांसद रामजी लाल सुमन के ऊपर हमले की घटना के बाद भी अब तक हमलावरों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि सांसद के आवागमन पर पाबंदी जैसी स्थिति पैदा कर दी गई है। यह घटनाक्रम न सिर्फ लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करता है बल्कि आम जनता की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता उत्पन्न करता है।
हमलावर आज़ाद, सांसद पर प्रतिबंध!
इस वीडियो में सांसद रामजी लाल सुमन पुलिस अफसरों से बात कर रहे हैं। उनको पुलिस कर्मी जाने से रोक रहे हैं। इस पर सांसद बोल रहे हैं कि मैं पॉलिटीशियन हूं, आप मुझे क्यों रोक रहे हैं। इस पर पुलिस अफसर हमले की आशंका जता रहे हैं, तो सांसद ने कहा कि हमलावर को पकड़ो, मुझ पर पाबंदी मत लगाओ। सपा प्रमुख ने कहा कि हमले की घटना के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि पुलिस तत्काल आरोपियों को गिरफ़्तार करेगी और सांसद को पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। लेकिन वास्तविकता इससे ठीक उलट दिख रही है। वीडियो फुटेज और गवाहों के बावजूद हमलावर अब तक खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि सांसद को आवाजाही और जनसंपर्क के सामान्य अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
‘जब सांसद ही सुरक्षित नहीं…’
राजनीतिक हलकों में यह सवाल गूंज रहा है कि जब एक लोकसभा सांसद सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की क्या गारंटी है? इसे लोकतंत्र का मखौल बताया है और कहा है कि यूपी में ‘शासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है।’
सरकार और प्रशासन निशाने पर
पीडीए नेताओं का आरोप है कि उत्तर प्रदेश की सरकार पूरी तरह अकार्यवाहक हो चुकी है और अधिकारी सिर्फ कार्यवाहक बनकर रह गए हैं। न तो पुलिस अपराध रोक पा रही है और न ही आपराधिक तत्वों की गतिविधियाँ। यह दर्शाता है कि प्रदेश में शासन की पकड़ कमजोर हो चुकी है।
वीडियो बना प्रमाण, कार्रवाई अब भी शून्य
घटना के एक वीडियो (उपलब्ध) में साफ़ देखा जा सकता है कि हमले की स्थिति उत्पन्न होने के बाद भी पुलिस और सुरक्षा बल निष्क्रिय नज़र आए। इस वीडियो को आधार मानकर कार्रवाई की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
