हमीरपुर /लखनऊ: यूपी के हमीरपुर जिले में जो दृश्य सामने आया। उसने सरकारी तंत्र और वीआईपी व्यवस्था के दोहरे मापदंडों को पूरी तरह उजागर कर दिया। एक तरफ आम नागरिक की मां का शव एंबुलेंस से पुल पार नहीं करने दिया गया, वहीं दूसरी ओर उसी पुल से वीआईपी गाड़ियां बेधड़क गुजरती रहीं।
घटना टेढ़ा गांव, सुमेरपुर क्षेत्र की है।

मृतका शिवदेवी, जिनका कानपुर में इलाज के दौरान निधन हो गया था, उनके शव को बेटे गांव ला रहे थे। शव वाहन जब यमुना पुल पर पहुंचा, तो उसे रोक दिया गया क्योंकि वहां मरम्मत कार्य के चलते नो एंट्री थी। बेटों ने पुलिस और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। आखिरकार, मां का शव स्ट्रेचर पर रखकर बेटों ने 1 किमी तक पैदल पुल पार किया। इस दौरान चार बार उन्हें शव को नीचे रखना पड़ा। आंखों में आंसू और कंधों पर मां की अर्थी लिए बेटों के इस सफर को जिसने भी देखा, वह सिस्टम को कोसता नजर आया।
बेटे की आवाज़ में बेबसी
मृतका के पुत्र बिंदा ने बताया कि “हमने मां का शव वाहन से ले जाने की अनुमति मांगी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। वहीं कुछ देर पहले बड़े अफसरों और नेताओं की गाड़ियां इसी पुल से निकलती रहीं।”
VIP के लिए नो एंट्री नहीं!
बड़े अफसरों और जनप्रतिनिधियों की गाड़ियां नो एंट्री में पुल पार करती रहीं। शनिवार को योग दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने लखनऊ से एक अफसर आए थे। जिनकी गाड़ी को नो एंट्री के बावजूद पुल से निकलने दिया गया। हमीरपुर के एक जनप्रतिनिधि की गाड़ी भी इसी पुल से गुज़री। उन्होंने कहा “मेरी गाड़ी उस समय निकली जब पुल पर पूरी तरह से आवागमन बंद नहीं था।” हालांकि, स्थानीय लोगों ने इसे सरासर भेदभाव करार दिया।
सिस्टम से सवाल
क्या VIP की सुविधा के आगे आम नागरिक का शव भी मायने नहीं रखता?। इसके साथ ही क्या इंसानियत सिर्फ किताबों और भाषणों तक सीमित रह गई है?। मगर, यह सवाल जनता के बीच उठ रहे हैं, लेकिन इनको कोई सुनने वाला नहीं।
