बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में बड़ी कार्रवाई की गई है। शासन और प्रशासन की दो अलग-अलग कार्रवाइयों में एक ओर जहां पूर्व जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामतेज यादव को वित्तीय गड़बड़ियों के चलते निलंबित कर दिया गया है, तो वहीं दूसरी ओर संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक रवींद्र कुमार तिवारी को रिश्वतखोरी और अनुशासनहीनता के आरोपों में सस्पेंड किया गया है। दोनों मामलों में उच्चस्तरीय जांच चल रही है।
डॉ. रामतेज यादव निलंबित, कार्यकाल में सामने आए गबन के गंभीर आरोप
उत्तर प्रदेश शासन ने बरेली के पूर्व जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामतेज यादव को उनके कार्यकाल (31 जुलाई 2014 से 31 मार्च 2018) के दौरान हुए वित्तीय गड़बड़ियों और सरकारी धन के गबन के आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित राजकीय ऊसर सुधार परिक्षेत्र में प्रबंधक पद पर तैनात थे।
जांच में पुष्टि, निलंबन की कार्रवाई
शासन द्वारा कराई गई जांच में यह प्रमाणित हुआ कि डॉ. यादव के कार्यकाल में कई वित्तीय अनियमितताएं हुईं। इसके आधार पर उन्हें निलंबन की सजा दी गई है।
धीरेंद्र चौधरी और अभिनंदन सिंह भी जांच के घेरे में
डॉ. यादव के बाद बरेली में तैनात रहे जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र चौधरी पर भी सरकारी मेलों और आयोजनों के नाम पर फंड का मनमाना भुगतान करने का आरोप है। जांच में यह पुष्टि हुई कि उन्होंने शासन के नियमों की अनदेखी की। तत्कालीन जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की संस्तुति के बावजूद अब तक उनके खिलाफ रिकवरी नहीं की गई है।उपनिदेशक कृषि अभिनंदन सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उन्हें स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वित्तीय अनियमितताओं पर कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
रिश्वत के आरोप में शिक्षा विभाग का वरिष्ठ सहायक सस्पेंड
संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय, बरेली में तैनात वरिष्ठ सहायक रवींद्र कुमार तिवारी को भी रिश्वतखोरी और अनुशासनहीनता के चलते निलंबित किया गया है। निलंबन के आदेश संयुक्त शिक्षा निदेशक राकेश कुमार द्वारा जारी किए गए।
शिकायत से खुला मामला
शिकायतकर्ता वेद कमल, जो वर्तमान में पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में संबद्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में रवींद्र तिवारी ने सेवा पत्रावली रोककर 68,500 रुपये की रिश्वत ली और नियमों के खिलाफ जाकर उन्हें निलंबित भी करवा दिया।
अनुशासनहीनता भी बनी कारण
रवींद्र तिवारी से जब स्पष्टीकरण मांगा गया तो उन्होंने उच्च अधिकारियों के सामने कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जिससे उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
जांच अधिकारी नियुक्त
इस प्रकरण की जांच के लिए डायट बदायूं के प्राचार्य गिरजेश कुमार चौधरी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। निलंबन अवधि में रवींद्र तिवारी को डायट ददरौल, शाहजहांपुर में संबद्ध किया गया है।
