बरेली : अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने रविवार को बरेली के राजेंद्रनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किसानों, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने किसानों को उनकी फसलों का वाजिब दाम न मिलने को सबसे बड़ा अन्याय बताते हुए नारा दिया।
“खेत हमारा, फसल हमारी तो कर्ज क्यों?”
डॉ. तोगड़िया ने कहा कि आज देश का किसान मेहनत करता है, लेकिन उसकी फसल का सही मूल्य उसे नहीं मिल पाता। इसी वजह से किसान कर्ज के बोझ तले दबता चला जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसानों को उनकी उपज का पूरा और न्यायसंगत मूल्य मिलना चाहिए, तभी गांव और देश समृद्ध होंगे।
किसानों के हक को बताया असली ‘राम’ का काम
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. तोगड़िया ने कहा,“किसानों को फसलों के सही दाम दिलाना ही आज का सबसे बड़ा धर्म है। यही है हमारा राम और यही है हमारा काम।”उन्होंने खेती को देश की रीढ़ बताते हुए कहा कि यदि किसान मजबूत होगा, तभी राष्ट्र मजबूत होगा।
सस्ती शिक्षा और रोजगार को बताया बुनियादी अधिकार
किसानों के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा और रोजगार के मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए। डॉ. तोगड़िया ने कहा कि सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर नागरिक का अधिकार है,पढ़ाई के बाद युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए,बिना रोजगार के शिक्षा अधूरी है। उन्होंने कहा कि भारत कभी दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र रहा है और अब एक बार फिर उस गौरव को लौटाने की जरूरत है।
बांग्लादेश और कश्मीर का किया जिक्र
डॉ. तोगड़िया ने अपने संबोधन में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वहां पिछले 14 वर्षों से हिंदुओं के खिलाफ हिंसा हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने इसकी तुलना 1990 के कश्मीरी पंडितों के पलायन से की।
राम मंदिर पर दिया बयान
राम मंदिर को लेकर उन्होंने कहा कि यह मंदिर किसी एक व्यक्ति या सरकार के पैसे से नहीं बना,आठ करोड़ हिंदुओं ने सवा रुपया देकर राम मंदिर निर्माण में योगदान दिया।उन्होंने कहा कि “हमारे घर से बड़ा घर हमारे भगवान का होना चाहिए।”
भारत के स्वर्णिम अतीत का किया स्मरण
डॉ. तोगड़िया ने कहा कि आज से लगभग 1700 वर्ष पहले भारत दुनिया का सबसे समृद्ध राष्ट्र था,उस समय भारत शिक्षा और ज्ञान का वैश्विक केंद्र था, भारत ने दुनिया को शून्य (0) दिया, आज अमेरिका सबसे समृद्ध देश है, लेकिन भारत में फिर से उस स्थान को पाने की क्षमता है।
कार्यक्रम में समर्थकों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभा के दौरान किसानों, युवाओं और शिक्षा से जुड़े नारों पर लोगों ने तालियों के साथ समर्थन जताया।
