लखनऊ : यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच चुनाव आयोग सख्त मोड में आ गया है। आयोग ने 127 राजनीतिक दलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि इन दलों ने बीते तीन वित्तीय वर्षों (2021-22, 2022-23 और 2023-24) के वार्षिक लेखा परीक्षित खाते समय पर जमा नहीं किए और न ही 2019 से अब तक हुए विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों के बाद निर्वाचन व्यय विवरणी दाखिल की।
जानें आयोग का नियम क्या कहता है?
विधानसभा चुनाव के बाद 75 दिन में और लोकसभा चुनाव के बाद 90 दिन में खर्च का ब्योरा दाखिल करना अनिवार्य है, लेकिन 127 दलों ने इस नियम का पालन नहीं किया। जिसके चलते इन दलों को नोटिस भेजा गया है। इसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं नेता शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) (78वें नंबर पर) है। इसका गठन 2018 में हुआ था। मगर, विधानसभा चुनाव 2022 में इसका सपा में विलय हो चुका है। इसके साथ ही आदर्शवादी कांग्रेस पार्टी, अभय समाज पार्टी, अखंड राष्ट्रवादी पार्टी, बहुजन पार्टी, आज़ाद समाज पार्टी, जनहित किसान पार्टी, जनता राज पार्टी, हमदर्द पार्टी, लोकदल, लोकतांत्रिक जनशक्ति पार्टी, राष्ट्रीय अपना दल, राष्ट्रीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी शामिल हैं।
3 अक्टूबर तक देना होगा जवाब
सभी दलों को 3 अक्टूबर 2025 तक अपना जवाब, शपथ-पत्र और जरूरी कागजात मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, लखनऊ में जमा करना होगा। सुनवाई की तारीखें 6, 7, 8 और 9 अक्टूबर तय की गई हैं। अगर, जवाब नहीं आया, तो यह माना जाएगा कि पार्टी के पास कुछ कहने को नहीं है और रिपोर्ट सीधे भारत निर्वाचन आयोग को भेज दी जाएगी।
