बाघ के हमले में खेत पर मारे गए 55 वर्षीय दयाराम, ग्रामीणों में डर और वन विभाग पर नाराज़गी
पीलीभीत/बरेली : यूपी के पीलीभीत टाइगर रिज़र्व से सटे इलाकों में बाघ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को छोटी फुलहर गांव के किसान दयाराम (55 वर्ष) बाघ के हमले में मारे गए। यह घटना पिछले दो महीनों में छठी मौत है। जिसने इलाके में दहशत और आक्रोश फैला दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की लापरवाही के चलते जानवर लगातार गांवों में घुस रहे हैं। मृतक के परिवार को मुआवज़े और गांवों को बाघ मुक्त बनाने की मांग तेज़ हो गई है।
खेत में शौच को गए थे किसान
छोटी फुलहर गांव निवासी दयाराम सोमवार सुबह खेत में शौच के लिए गए थे। खेत घर से महज 20 मीटर की दूरी पर था, लेकिन झाड़ियों में छिपे बाघ ने अचानक हमला कर दिया। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण दौड़े, लेकिन बाघ दयाराम को गन्ने के खेत तक घसीट चुका था। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ भाग निकला, लेकिन तब तक दयाराम की मौत हो चुकी थी।
पिछले दो महीने में बाघ के हमलों में छह मौतें
पीलीभीत में बाघ के हमले से दो महीने में 6 मौतें हो चुकीं हैं। इसमें 14 मई को नजीरगंज सिंचाई कर रहे हंसराज पर हमला, 18 मई को चतीपुर गन्ना छील रहे राम प्रसाद की हमले से मौत, 25 मई को खिरकिया बरगदिया लौंगश्री की जान गई, 3 जून को शांतिनगर में बर्तन धो रही रेशमा की मौत, 9 जून को मेवातपुर के खेत में किसान पर हमले के बाद मौत, और 14 जुलाई को छोटी फुलहर के दयाराम बाघ का शिकार बने।
ग्रामीणों का दर्द और वन विभाग पर सवाल
दयाराम के भतीजे बृजलाल ने कहा कि “गांव के बाहर खुले खेतों में अब डर लगता है हर दिन कोई न कोई मारा जा रहा है। क्या हमारी जान की कीमत नहीं?”। दयाराम की बहू गीता ने बताया कि गांव में बाघ अक्सर पालतू जानवरों को भी उठाकर ले जाता है। हालांकि, DFO ने मीडिया को बताया कि “हमने बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए टीमें तैनात कर दी हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। शासन से पकड़ने की अनुमति मिल चुकी है।”वन विभाग के अनुसार टूटी तारबंदी और गन्ने के खेतों में छिपने की सुविधा के कारण बाघ बाहर निकल रहे हैं। फेंसिंग को दुरुस्त करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
