नाम में क्या रखा है?,लेकिन बरेली के मोहल्लों के नाम सुनकर आप कहेंगे, नाम में ही तो इतिहास छिपा है!
बरेली : झुमका, सुरमा, और मांझे के लिए चर्चित बरेली शहर अजीबो -ग़रीब मोहल्लों के नामों के लिए भी मशहूर है। इनमें से कई नाम तो ऐसे हैं, जिन्हें सुनते ही हंसी आ जाए, लेकिन जब आप उनके पीछे की हकीकत सुनेंगे, तो यही हंसी इतिहास की गंभीरता में बदल जाएगी। बरेली के ये मोहल्ले न सिर्फ शहरी भूगोल को दर्शाते हैं, बल्कि सांप्रदायिक समरसता, व्यापारिक इतिहास, और औपनिवेशिक भारत की झलक भी देते हैं। बरेली के इन मोहल्लों के नाम मज़ाक जैसे लग सकते हैं, लेकिन उनके पीछे की कहानियां इतिहास, परंपरा, संघर्ष और हास्य का अद्भुत संगम हैं। ये मोहल्ले सिर्फ रास्ते नहीं, यह बरेली की सांस्कृतिक आत्मा हैं।
झगड़े वाली मठिया
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शहर के बिहारीपुर इलाके में स्थित झगड़े वाली मठिया का इलाका धार्मिक जुलूसों की वजह से अक्सर चर्चा में रहता था। एक बार ताजिए को लेकर इतना बड़ा विवाद हुआ कि तभी से इसका नाम पड़ गया, “झगड़े वाली मठिया” हो गया। यह मोहल्ला अतिसंवेदनशील में आता है।
फाल्तूनगंज
बरेली कॉलेज से श्यामगंज तक
अंग्रेज अफसर फाल्तून के नाम पर बसा ये इलाका पहले खेड़ा कहलाता था। कालांतर में ये “फाल्तूनगंज” बना। आज लोग इसे “कालीबाड़ी” भी कहते हैं, लेकिन असल नाम अब भी ज़िंदा है।
रबड़ी टोला
शहर की शाहदाना वली दरगाह के सामने स्थित रबड़ी टोला में एक समय रबड़ी की मशहूर दुकान हुआ करती थी। वही दुकान इस मोहल्ले की पहचान बन गई, और तब से इसे कहा जाने लगा “रबड़ी टोला”।
पटे की बजरिया
शहर के भूड़ क्षेत्र में पटे लाला की दूध और मिठाई की दुकान थी। लोगों ने उस दुकान के नाम पर ही इलाके को “पटे की बजरिया” कहना शुरू कर दिया।
नीम की चढ़ाई
शहर के बड़ा बाजार का इलाका एक नीम के पेड़ के कारण जाना गया, जो ऊंचाई पर स्थित था। बाद में यह पेड़ मोहल्ले की पहचान बन गया, “नीम की चढ़ाई”।
चक महमूद
यह एक ज़मींदार के नाम पर बसा इलाका है। बताया जाता है कि नवाब महमूद खां का चक (खेत) था। इसलिए आबादी बसने के बाद मुहल्ले का नाम जमींदार के नाम चक महमूद हो गया।
रोहली टोला
रूहेलखंड के इतिहास से रोहली टोला मुहल्ले का इतिहास जुड़ा है। यहां पहले अदालत लगती थी। इस बिल्डिंग का किले नुमा कुछ हिस्सा अभी भी इतिहास बताता है।
काजी टोला
शहर के पुराना शहर में स्थित काजी टोला पुराने समय में क़ाज़ियों का ठिकाना था। यहां काजी रहते थे। मगर, अब काजियों के कुछ परिवार भी बचे हैं।
कटकुइया
स्थानीय भाषा से उत्पन्न, देहाती संस्कृति का प्रतीक है। यह इलाका भी पुराना शहर में दरगाह शाहदाना के पास है। काजी टोला के बाद कटकुइया मोहल्ला शुरू हो जाता है।
गुलाब राय
शहर के प्रेमनगर में गुलाब राय नाम के व्यापारी और समाजसेवी के नाम पर यह मोहल्ला बसा। आज भी यह बरेली के प्रमुख आवासीय क्षेत्रों में गिना जाता है। इनके नाम से गुलाब राय मांटेसरी (जीआरएम) स्कूल भी हैं।
सुभाष नगर
बरेली जंक्शन से पश्चिम का इलाका
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर बना है। यह मोहल्ला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विरासत को सहेजता है।
बड़ी बजरिया
मुगलकाल से लेकर नवाबी दौर तक यह बड़ा बाज़ार व्यापार का गढ़ रहा। लकड़ी, मसाले और कपड़ों का सबसे बड़ा केंद्र यही था।
मिर्ज़ा टोला
Location: दरगाह शाहदाना वली के पास नवाबी खानदान मिर्ज़ा के नाम से बसा यह टोला धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का गवाह है।
