लखनऊ/सीतापुर : यूपी में प्राथमिक स्कूलों के विलय को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सीतापुर के स्कूलों में “यथास्थिति बनाए रखने” का आदेश देते हुए फिलहाल स्कूलों का मर्जर रोक दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इससे सीतापुर के छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
कोर्ट ने क्यों दिया स्टे?
9 जुलाई को दाखिल की गई याचिकाओं में आरोप था कि स्कूलों का विलय मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून का उल्लंघन करता है। याचियों ने कहा कि मर्जर से छोटे बच्चों को दूर स्कूल जाना पड़ेगा, जिससे शिक्षा बाधित होगी। सरकार द्वारा पेश दस्तावेजों में अनियमितताएं पाई गईं, जिसके आधार पर कोर्ट ने स्टे दिया है। अगली सुनवाई की तारीख 21 अगस्त तय की गई है।
कौन-कौन थे पक्ष में
याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील डॉ. एलपी मिश्रा और गौरव मेहरोत्रा ने पैरवी की। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया और शैलेंद्र कुमार सिंह उपस्थित रहे।
जानें मर्जर प्लान?
उत्तर प्रदेश सरकार ने 16 जून 2025 को आदेश जारी कर कहा था कि जिन स्कूलों में कम बच्चे हैं। उन्हें पास के उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय कर दिया जाए। सरकार के अनुसार, यह फैसला संसाधनों के बेहतर उपयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए है। सरकार ने 18 स्कूलों का हवाला दिया। जिनमें एक भी बच्चा नामांकित नहीं था।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बड़ा हमला
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने हाईकोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “अगर भाजपाई मनमानी कर स्कूल मर्जर करते हैं, तो हम हर गांव में ‘पीडीए पाठशाला’ खोलेंगे। भाजपा स्कूल बंद कर रही है और कार्यालय खोल रही है। भाजपा जाए तो शिक्षा आए!” उन्होंने स्कूल मर्जर को “पीडीए समाज के खिलाफ भाजपाई साजिश” करार दिया।
