दिल्ली : देशभर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के कमजोर और असमान क्रियान्वयन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि मौजूदा खामियों के रहते आज की पीढ़ी भविष्य के विधायी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती। न्यायालय ने दोहराया कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है और इसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्कूल पाठ्यक्रम और स्थानीय भाषाओं में जागरूकता पर जोर
अदालत ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नियम 33 के तहत निर्देश जारी करते हुए कहा कि स्कूल पाठ्यक्रम में ठोस कचरा प्रबंधन की व्यावहारिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इसके साथ ही जागरूकता की कमी को दूर करने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के सार विशेषकर घरों और नागरिकों से जुड़े प्रावधानों का राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की स्थानीय भाषाओं में अनुवाद कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि आम नागरिक नियमों को समझ सकें और उनका पालन कर सकें।
“अभी नहीं तो कभी नहीं” : स्रोत पर पृथक्करण अनिवार्य
न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी की पीठ ने कहा, “अभी नहीं तो कभी नहीं। स्रोत पर पृथक्करण और बुनियादी ढांचे की ठोस तैयारी के बिना उच्च परिणाम की अपेक्षा अव्यावहारिक है।” अदालत ने स्पष्ट किया कि नगरपालिका ठोस कचरे की उपेक्षा से न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि जन-स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ेगा। जब दुनिया तकनीकी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी में भारत की ओर देख रही है, तब 2026 के नियमों का पूर्ण पालन जरूरी है।
स्थानीय निकायों को सख्त निर्देश, 100% अनुपालन की समय-सीमा तय हो
सुप्रीम कोर्ट ने पार्षदों, महापौरों, अध्यक्षों, निगम पार्षदों और वार्ड सदस्यों को ‘लीड फैसिलिटेटर’ नामित करते हुए कहा कि स्रोत पर कचरा पृथक्करण की शिक्षा देना उनका वैधानिक दायित्व है। अदालत ने निर्देश दिया कि प्रत्येक स्थानीय निकाय 100 प्रतिशत अनुपालन की समय-सीमा तय करे और उसे सार्वजनिक करे। जिला कलेक्टरों के माध्यम से ठोस कचरा प्रबंधन अवसंरचना का ऑडिट कराया जाए और उसकी रिपोर्ट समयबद्ध रूप से मुख्य सचिव को दी जाए। साथ ही, स्थानीय निकायों को फोटोग्राफिक साक्ष्य सहित अनुपालन रिपोर्ट ईमेल के जरिए जिला कलेक्टर कार्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण व्यवस्था गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल के लिए आवश्यक अवसंरचना शीघ्र चालू करने को कहा गया है।
