बरेली: बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को 100 प्रतिशत किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ बैंक और बीमा कर्मचारियों व अधिकारी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। जीवन बीमा निगम (LIC) के मंडलीय कार्यालय पर भोजनावकाश के दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी कर बीमा कानून संशोधन विधेयक 2025 का विरोध दर्ज कराया।
लोकसभा में पेश बीमा कानून संशोधन विधेयक 2025 बना विरोध का कारण
हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में बीमा कानून संशोधन विधेयक 2025 पेश किया गया है। इस विधेयक के जरिए बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसी के विरोध में देशभर में ट्रेड यूनियनों द्वारा प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
सबका बीमा सबकी रक्षा नाम भ्रामक : डॉ. अंचल अहेरी
प्रदर्शन सभा की अध्यक्षता करते हुए बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के डॉ. अंचल अहेरी ने कहा कि सरकार ने इस विधेयक को “सबका बीमा सबकी रक्षा” जैसा भ्रामक नाम दिया है। उन्होंने कहा कि बीमा कोई साधारण व्यापार नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन है। जनहित के नाम पर लाई जा रही यह नीति वास्तव में आम जनता के हितों के खिलाफ है। बीमा अधिकारी संघ के प्रेम शंकर ने बताया कि इस विधेयक में बीमा अधिनियम 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम 1956 और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम 1999 में संशोधन का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही इसके उद्देश्य विकास और पारदर्शिता बताती हो, लेकिन वास्तविकता में यह देश की घरेलू बचत को विदेशी पूंजी के हवाले करने जैसा है।
74% एफडीआई सीमा पहले से ही पर्याप्त : संजीव मेहरोत्रा
ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में घरेलू बचत की अहम भूमिका होती है। भारत जैसे कल्याणकारी राज्य को अपनी घरेलू बचत पर नियंत्रण बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि 74 प्रतिशत की मौजूदा एफडीआई सीमा पर्याप्त से अधिक है और निजी क्षेत्र के विस्तार में कोई बाधा नहीं है।
विदेशी निवेश का वर्तमान स्तर कम, फिर बढ़ाने की जरूरत क्यों?
बीमा कर्मचारी संघ की गीता शांतने ने कहा कि 3 दिसंबर को लोकसभा में दिए गए एक लिखित उत्तर के अनुसार बीमा क्षेत्र में विदेशी इक्विटी निवेश 31 मार्च 2024 तक केवल 32.67 प्रतिशत है, जबकि सीमा 74 प्रतिशत तय है। ऐसे में इसे 100 प्रतिशत करने का कोई औचित्य नहीं बनता। बैंक यूनियन के रंजन मोहिले ने कहा कि 100 प्रतिशत एफडीआई से बीमा कंपनियां केवल मुनाफे वाले क्षेत्रों पर ध्यान देंगी, जिससे निम्न, मध्यम और वंचित वर्गों की बीमा जरूरतों की अनदेखी होगी।
अनिश्चित आर्थिक हालात में जोखिम भरा फैसला
बीमा कर्मचारी संघ के मोहम्मद मुस्तकीम ने कहा कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पूंजी बहिर्गमन के दौर में घरेलू बचत तक विदेशी पूंजी को अधिक नियंत्रण देना अविवेकपूर्ण होगा। ऐसे समय में सरकार को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। प्रदर्शन सभा को मनोज वैश्य, रंजन मोहिले, अनिल शर्मा, रियाज अहमद, तौसीफ, अनामिका सारस्वत, पूनम ओबेरॉय, शशांक, मोहम्मद फैज, मनीष बहल और अरविंद महेश्वरी सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
