बिहार : नालंदा जिले से एक बेहद दुखद और हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। बिहारशरीफ के मघड़ा स्थित माता शीतला मंदिर में मंगलवार को अचानक भगदड़ मचने से नौ महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। इस घटना ने एक बार फिर भीड़ प्रबंधन और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, चैत माह के अंतिम मंगलवार के अवसर पर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। माता शीतला के दर्शन और पूजा के लिए आसपास के गांवों और जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। भीड़ इतनी अधिक थी कि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। इसी बीच अचानक किसी अफवाह के फैलने से स्थिति बिगड़ गई और देखते ही देखते भगदड़ मच गई।
भगदड़ के दौरान लोग एक-दूसरे को बचाने के बजाय खुद को सुरक्षित करने के प्रयास में इधर-उधर भागने लगे। भीड़ के दबाव में कई लोग जमीन पर गिर पड़े और फिर उनके ऊपर से लोग गुजरते चले गए। इस अफरा-तफरी में नौ महिला श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में दयावंती देवी, मालो देवी, किरता देवी, रीता देवी, आशा देवी और रेखा देवी की पहचान हो चुकी है, जबकि तीन अन्य की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
घटना के बाद मंदिर परिसर में चीख-पुकार मच गई। हर कोई अपने परिजनों को ढूंढने में जुट गया। कई लोग अपने परिवार से बिछड़ गए, जिससे हालात और भी भयावह हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन को सूचना मिलते ही पुलिस और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गए। घायलों को तत्काल बिहारशरीफ के मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक अहम बात यह भी सामने आई कि उसी दिन नालंदा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का दौरा प्रस्तावित था। इसके चलते जिले का प्रशासनिक तंत्र मुख्य रूप से राष्ट्रपति के कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त था। ऐसे में मंदिर में उमड़ी भारी भीड़ के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था नहीं हो सकी, जो इस हादसे का एक बड़ा कारण मानी जा रही है।
घटना के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह हादसा अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए कुल छह लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है, जिसमें चार लाख रुपये आपदा प्रबंधन विभाग से और दो लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं और घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद है और इसमें जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है। यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए जाते। हर साल देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे हादसे सामने आते हैं, लेकिन उनसे सबक लेने की प्रक्रिया कहीं न कहीं कमजोर नजर आती है।
माता शीतला मंदिर में हुई यह भगदड़ न सिर्फ कई परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति लेकर आई है, बल्कि प्रशासनिक तैयारियों की कमी को भी उजागर करती है। अब जरूरी है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। फिलहाल पूरे इलाके में मातम का माहौल है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह दुख कभी भरने वाला नहीं है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह न केवल पीड़ितों को हर संभव सहायता दे, बल्कि ऐसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित करे, जिससे आस्था के इन केंद्रों पर श्रद्धालु सुरक्षित महसूस कर सकें।
