संभल, उत्तर प्रदेश: संभल जिले में जामा मस्जिद को लेकर भड़कने वाली हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व पुलिस अधीक्षक अनुज चौधरी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सीजेएम कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी, जिसमें ASP अनुज चौधरी और अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया था।
हाईकोर्ट की सुनवाई और अंतरिम राहत
सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार और ASP अनुज चौधरी की ओर से दाखिल याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाओं में निचली अदालत के आदेश को विभिन्न आधारों पर चुनौती दी गई थी। इसके बाद मंगलवार को भी सुनवाई हुई, जिसमें सभी पक्ष अपनी दलीलें पेश कर चुके हैं। हाईकोर्ट ने फिलहाल ASP अनुज चौधरी को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद अगली तारीख 5 हफ्ते बाद तय की है। हाईकोर्ट का यह आदेश अनुज चौधरी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके खिलाफ FIR की प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है।
संभल हिंसा की पृष्ठभूमि
संभल जिले के नखासा थाना क्षेत्र में 24 नवंबर, 2024 को हिंसा भड़की थी। मामला उस समय शुरू हुआ जब यामीन ने CJM कोर्ट में याचिका दायर की थी। यामीन ने दावा किया कि उनके बेटे आलम घर से टोस्ट (Rusk) बेचने निकले थे, तभी शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में उन्हें पुलिस ने गोली मार दी। यामीन ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी और संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिस कर्मियों को आरोपी बनाया। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। याचिका में कहा गया कि यामीन के बेटे ने अपने इलाज के लिए पुलिस की निगरानी से छिपकर इलाज कराया। कोर्ट से पूर्व ASP अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी।
जामा मस्जिद विवाद और हिंसा का कारण
संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि यह पहले हरिहर मंदिर था, जिसे बाबर ने 1529 में तुड़वाकर मस्जिद बनवाया। इस मामले को लेकर 19 नवंबर, 2024 को संभल कोर्ट में याचिका दायर की गई। सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह ने मस्जिद के अंदर सर्वे करने का आदेश दिया। इस सर्वे के लिए रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया गया। पहले दिन सर्वे टीम ने दो घंटे का सर्वे किया। 24 नवंबर को सर्वे टीम फिर जामा मस्जिद में गई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। भीड़ ने पुलिस टीम पर पत्थर फेंके, जिससे हिंसा भड़क गई।
हिंसा और तबाही
हिंसा के दौरान गोलीबारी हुई और आगजनी भी हुई। गोली लगने से चार लोगों की मौत हुई और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, सीओ अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने इस हिंसा के बाद 79 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं। संभल कोतवाली और नखासा में कुल 12 FIR दर्ज की गईं।
सियासी और कानूनी पहल
हिंसा के बाद सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 40 लोगों के खिलाफ नामजद और 2750 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। 18 जून, 2025 को SIT ने 1128 पन्नों में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सांसद बर्क सहित 23 लोगों को शामिल किया गया। हालांकि, सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं है।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
ASP अनुज चौधरी और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक ने प्रशासन और पुलिस के पक्ष को मजबूत किया है। अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय की सुनवाई पूरी पारदर्शिता के साथ होगी। इस मामले में सुरक्षा बलों और पुलिस अधिकारियों को जनता और कानून दोनों का ध्यान रखना था। हाईकोर्ट की अंतरिम राहत से यह साफ संकेत मिलता है कि कोर्ट अब मामले की गहन जांच के लिए समय लेगा।
आगे की सुनवाई और संभावित परिणाम
इलाहाबाद हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 5 हफ्ते बाद होगी। इस दौरान सभी पक्ष अपनी दलीलों को पेश करेंगे। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई, FIR और चार्जशीट की जांच हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक तनाव को उजागर करता है। कोर्ट का अंतिम आदेश पुलिस कर्मियों के भविष्य और कानून के क्रियान्वयन पर सीधा असर डालेगा।
