नई दिल्ली : आज देश और दुनिया की नजरें दिल्ली पर हैं, क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंच गए हैं। इस दौरे के दौरान कल यानी शुक्रवार को पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की शिखर वार्ता होगी। पुतिन के दौरे से ठीक पहले रूस की कैबिनेट ने भारत के साथ नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए अहम समझौते को मंजूरी दे दी है। इस समझौते पर राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं की शिखर वार्ता में रक्षा सहयोग, द्विपक्षीय व्यापार को वैश्विक दबाव से सुरक्षित रखना और छोटे परमाणु रिएक्टरों में सहयोग के मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
रूसी मीडिया के मुताबिक, तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में कई रिएक्टर बना रही रूस की प्रमुख परमाणु कंपनी रोसटॉम को भारत की एजेंसियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी गई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि रोसटॉम के सीईओ अलेक्सी लिगाचेव दिल्ली में शिखर वार्ता के दौरान कई नए प्रस्ताव पेश करेंगे, जिनमें छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) बनाने के संबंध में सहयोग शामिल है।
राष्ट्रपति पुतिन के आगमन के कुछ घंटे बाद प्रधानमंत्री मोदी उनके सम्मान में निजी भोज देंगे। अमेरिका के साथ रिश्तों में लगातार बदलाव के बीच भारत, रूस के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। रूसी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, क्रेमलिन अधिकारी यूरी उशाकोव ने बताया कि इस दौरे के दौरान भारत और रूस 2030 तक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों के विकास के लिए कार्यक्रम पर भी हस्ताक्षर करेंगे।
साथ ही, रक्षा मंत्रियों की बैठक भी बृहस्पतिवार को तय है। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव के बीच एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद, सुखोई-30 विमानों के उन्नयन और ब्रह्मोस के उन्नत संस्करण पर चर्चा होगी। दोनों के बीच भविष्य में एस-500 मिसाइल प्रणाली पर भी बातचीत की संभावना है। यह दौरा भारत-रूस संबंधों में नई ऊँचाइयों को छूने का अवसर माना जा रहा है। रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग के कई महत्वपूर्ण समझौते इस दौरे के दौरान तय होने वाले हैं, जो दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक संबंध को और मजबूत करेंगे।
