पंडित सुशील पाठक बोले-सनातन आस्था को ठेस पहुंचाने की साजिश, सरकार करे तत्काल हस्तक्षेप
लखनऊ/बरेली : यूपी के प्रयागराज के पवित्र ‘संगम’ नाम पर शराब ब्रांड लॉन्च किए जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। संत समाज और धार्मिक संगठनों ने इसे सनातन धर्म की आस्था पर सीधा प्रहार बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। इसी क्रम में पंडित सुशील पाठक ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संबंधित डिस्टलरी कंपनी और उसके मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था
श्री शिरडी साई-खाटूश्याम सर्वदेव मंदिर के महंत पंडित सुशील पाठक ने कहा कि ‘संगम’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है। प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु स्नान और पूजा -अर्चना के लिए पहुंचते हैं, जबकि Maha Kumbh जैसे आयोजनों में करोड़ों लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र नाम का शराब जैसे उत्पाद के लिए इस्तेमाल किया जाना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।
सनातन धर्म की छवि धूमिल करने की साजिश
पंडित पाठक ने आरोप लगाया कि यह सनातन धर्म की छवि धूमिल करने की सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि सरकार को मामले का संज्ञान लेते हुए ब्रांड नाम पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।
संत समाज हुआ एकजुट, आंदोलन की चेतावनी
इस मुद्दे पर संत समाज भी खुलकर विरोध में उतर आया है। शांडिल्य ने भी ‘संगम’ नाम के शराब ब्रांड पर कड़ी आपत्ति जताई है। संतों का कहना है कि धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखने वाले शब्दों का व्यावसायिक और विशेषकर शराब जैसे उत्पादों में उपयोग समाज में गलत संदेश देता है। पंडित सुशील पाठक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो साधु-संत आंदोलन और अनशन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि संत समाज इस मामले में पूरी तरह एकजुट है और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक विरोध जारी रहेगा।
धार्मिक संगठनों ने उठाई कानूनी कार्रवाई की मांग
धार्मिक संगठनों और हिंदूवादी नेताओं ने मांग की है कि संबंधित कंपनी के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसे ब्रांड नामों के उपयोग को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की भी मांग उठ रही है, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक प्रतीक, तीर्थ या आस्था से जुड़े नाम का गलत इस्तेमाल न हो सके।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
‘संगम’ नाम को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। बड़ी संख्या में लोग इस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे ब्रांडिंग का मामला बता रहे हैं। हालांकि धार्मिक संगठनों का कहना है कि आस्था से जुड़े प्रतीकों का सम्मान हर परिस्थिति में होना चाहिए।
सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
अब इस पूरे विवाद में सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। संत समाज ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
