नई दिल्ली : भारत मंडपम में आयोजित दूसरे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन का भव्य आयोजन देश और दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने शिरकत की। समिट के दौरान वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा, योग और समग्र स्वास्थ्य पद्धतियों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डब्ल्यूएचओ के डीजी डॉ. टेड्रोस ने दिल्ली में स्थित नए डब्ल्यूएचओ–साउथ ईस्ट एशियाई क्षेत्रीय कार्यालय कॉम्प्लेक्स का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। यह नया कार्यालय दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में स्वास्थ्य से जुड़ी पहलों, नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और अधिक सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यालय के माध्यम से भारत सहित पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार होगा। समिट के दौरान पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली कई प्रमुख हस्तियों और संस्थाओं को भी सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी और डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार, शोध और सेवा के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।
इसी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री योग पुरस्कार 2021–2025 के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों के जरिए उन व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मान दिया गया, जिन्होंने योग के प्रचार-प्रसार, अनुसंधान और वैश्विक स्तर पर इसके विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि योग आज केवल भारत की पहचान नहीं, बल्कि विश्व की साझा विरासत बन चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि योग और पारंपरिक चिकित्सा न केवल रोगों के उपचार में सहायक हैं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान का समन्वय ही भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बना सकता है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा और योग के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समिट दुनिया भर में समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।
