देवहा और शारदा के खतरे के बावजूद 44 जिलों की सूची में नाम नहीं, कुमुद गंगवार ने दी आंदोलन की चेतावनी
पीलीभीत : उत्तर प्रदेश में बाढ़ के मौसम की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।पीलीभीत जिले को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां प्रदेश सरकार द्वारा जारी बाढ़ प्रभावित 44 जिलों की सूची में जिले का नाम शामिल न होने पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पीलीभीत ऐसा जिला है जो लगभग हर वर्ष बाढ़ की मार झेलता है, लेकिन इसके बावजूद इसे संवेदनशील जिलों की सूची से बाहर रखना बेहद हैरान करने वाला और चिंताजनक है।
जानें क्या है मामला?
दरअसल, स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की फ्लड मॉक एक्सरसाइज रिपोर्ट-2025 में उत्तर प्रदेश के 44 जिलों को बाढ़ की संवेदनशीलता के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इस रिपोर्ट में गोमती, शारदा और घाघरा जैसी प्रमुख नदियों के किनारे बसे जिलों को शामिल किया गया है।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पीलीभीत, जो शारदा नदी के प्रभाव क्षेत्र में आता है और जहां देवहा नदी हर साल तबाही मचाती है, उसका नाम इस सूची में नहीं है।
हर साल बाढ़ का दंश झेलता है पीलीभीत
स्थानीय स्तर पर देखा जाए तो पीलीभीत के कई क्षेत्र हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होते हैं। देवहा नदी अमरिया, ललौरीखेड़ा, बरखेड़ा और बीसलपुर क्षेत्रों में जलभराव और फसलों के नुकसान का बड़ा कारण बनती है। वहीं शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने पर पूरनपुर और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। ऐसे में जिले को बाढ़ प्रभावित सूची से बाहर रखना प्रशासनिक तैयारियों और जोखिम आकलन पर सवाल खड़े करता है।
हर साल डूबता पीलीभीत, फिर भी नो एंट्री
कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक “तकनीकी चूक” नहीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की विफलता और जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन जिलों में बाढ़ का खतरा अपेक्षाकृत कम है, उन्हें सूची में शामिल किया गया है, जबकि पीलीभीत जैसे संवेदनशील जिले को नजरअंदाज कर दिया गया। कुमुद गंगवार ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस गलती को सुधारा नहीं गया और पीलीभीत को बाढ़ प्रभावित जिलों की सूची में शामिल नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी किसानों और आम जनता के हक में बड़ा जन-आंदोलन शुरू करेगी।
प्रशासन की चुप्पी, बढ़े सवाल
इस मुद्दे पर अब तक जिला प्रशासन या सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक रूप से और गरमाने की संभावना है।विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ प्रभावित जिलों की सूची में शामिल होने से राहत और बचाव कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन, फंड और योजनाएं उपलब्ध होती हैं। ऐसे में पीलीभीत का बाहर रहना सीधे तौर पर यहां के किसानों और आम जनता को प्रभावित कर सकता है।
रिपोर्ट : ऋतिक द्विवेदी
