Moradabad Export News: कंटेनर संकट और बढ़ते फ्रेट रेट से हैंडीक्राफ्ट निर्यात उद्योग पर मंडराया खतरा
क्रिसमस और फेस्टिव सीजन के ऑर्डर प्रभावित होने की आशंका, निर्यातकों ने कंटेनर उपलब्ध कराने और फ्रेट रेट नियंत्रित करने की उठाई मांग
मुरादाबाद: देशभर के हैंडीक्राफ्ट्स एवं होम डेकोर निर्यातकों के सामने इस समय कंटेनरों की भारी कमी और लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय फ्रेट रेट के कारण गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एमएचईए) ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधरी तो न केवल मौजूदा शिपमेंट प्रभावित होंगे, बल्कि अगले वर्ष मिलने वाले निर्यात ऑर्डरों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।
क्रिसमस सीजन की सप्लाई पर मंडरा रहा खतरा
एसोसिएशन के अनुसार जुलाई का अंतिम सप्ताह निर्यात उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इसी अवधि में दुनिया भर के बड़े खरीदार क्रिसमस और फेस्टिव सीजन के लिए माल मंगाते हैं। कंटेनरों की कमी के कारण तैयार माल फैक्ट्रियों और गोदामों में अटका हुआ है। यदि शिपमेंट समय पर नहीं हो पाए तो विदेशी खरीदारों तक माल देर से पहुंचेगा, जिससे उनके पास अतिरिक्त स्टॉक जमा हो जाएगा और अगले वर्ष ऑर्डरों में कमी आ सकती है।
बढ़ते फ्रेट रेट से निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ
एमएचईए ने बताया कि हाल के सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय फ्रेट रेट में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एशिया से यूरोप मार्ग पर फ्रेट रेट में 35 से 45 प्रतिशत तक और एशिया से अमेरिका के पूर्वी तट तक 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। वहीं कंटेनरों की उपलब्धता लगातार घटने से शिपमेंट की बुकिंग भी मुश्किल होती जा रही है।
एफओबी निर्यातकों के सामने नई चुनौती
एसोसिएशन का कहना है कि एफओबी (फ्री ऑन बोर्ड) आधार पर होने वाले निर्यात में सामान्यतः फ्रेट का खर्च खरीदार वहन करता है। लेकिन बढ़ती परिवहन लागत के कारण अब कई विदेशी खरीदार निर्यातकों से फ्रेट खर्च साझा करने का अनुरोध कर रहे हैं। कई निर्यातक मजबूरी में अतिरिक्त लागत उठा रहे हैं ताकि समय पर माल भेजा जा सके। इससे पहले से कम मार्जिन पर काम कर रहे निर्यातकों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नावेद उर रहमान ने कहा कि कंटेनर की कमी और बढ़ते फ्रेट रेट ने निर्यात उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार, शिपिंग मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय और शिपिंग कंपनियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि कंटेनरों की उपलब्धता बढ़ाई जाए, फ्रेट रेट स्थिर किए जाएं और निर्यातकों को राहत दी जाए।
निर्यातकों की प्रमुख मांगें
- कंटेनरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए आपात व्यवस्था की जाए।
- शिपिंग कंपनियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाए।
- अंतरराष्ट्रीय फ्रेट रेट को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
- निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाए।
- बंदरगाहों और लॉजिस्टिक व्यवस्था को और तेज एवं सुगम बनाया जाए।
उद्योग पर पड़ सकता है दीर्घकालिक असर
एमएचईए का कहना है कि यदि समय पर समाधान नहीं निकला तो इसका असर केवल वर्तमान निर्यात पर नहीं, बल्कि अगले वर्ष मिलने वाले विदेशी ऑर्डरों और देश के हैंडीक्राफ्ट निर्यात उद्योग की स्थिरता पर भी पड़ेगा। निर्यातकों ने सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है, ताकि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनी रहे।
