एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष ने मुस्लिम युवाओं से धार्मिक आयोजनों से दूर रहने की अपील की, दिल्ली के प्रदर्शन और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर भी रखी अपनी बात
मुरादाबाद: एआईएमआईएम के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने मुरादाबाद में मुस्लिम युवाओं के गरबा पंडालों और रामलीला में शामिल होने को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम मुस्लिम युवाओं को शराबखाने, जुआघर, होली के आयोजन और रामलीला देखने जैसी गतिविधियों में शामिल होने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने युवाओं से ऐसी गतिविधियों से दूर रहने और मस्जिदों तथा दरगाहों से जुड़े रहने की अपील की। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब मुरादाबाद सहित कई जगहों पर हिंदू संगठनों की ओर से कथित ‘लव जिहाद’ को लेकर पोस्टर लगाए जाने की चर्चा है।
‘मुस्लिम युवाओं की जगह मस्जिद और दरगाह है’
शौकत अली ने कहा कि मुस्लिम युवाओं को गरबा पंडालों और रामलीला जैसे आयोजनों में जाने से बचना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में शराबखाने, जुआघर और होली के आयोजनों का भी जिक्र किया। शौकत अली की टिप्पणी धार्मिक आयोजनों में युवाओं की भागीदारी को लेकर उनकी व्यक्तिगत और धार्मिक व्याख्या को दर्शाती है। वहीं, मुरादाबाद में पोस्टर लगाए जाने और उनसे जुड़े दावों को लेकर संबंधित संगठनों का पक्ष सामने आना भी अहम होगा।
‘लोकतांत्रिक देश की तुलना बांग्लादेश से नहीं कर सकते’
दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान नेहा बोरा की ओर से कथित तौर पर दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए शौकत अली ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और इसकी तुलना बांग्लादेश से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन जनता का अधिकार है, लेकिन यह संवैधानिक तरीके से होना चाहिए और इसमें अराजकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है, वहां जनता को प्रदर्शन करने का अधिकार है। उनके मुताबिक, विरोध का तरीका लोकतांत्रिक और संवैधानिक होना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के मुद्दे पर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके की तिरंगा यात्रा और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर भी शौकत अली ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा के बारे में आयोजक ही बेहतर बता सकते हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर चिंता जताई और कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर पहले दिन से विरोध कर रही है। शौकत अली ने यह सवाल भी उठाया कि यदि किसी एक अधिकारी को हटाया जाता है तो उसकी जगह दूसरा अधिकारी आ सकता है, इसलिए लड़ाई किसी व्यक्ति के बजाय व्यवस्था में सुधार के लिए होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि ज्ञानेश कुमार से संबंधित कानून बनाए जाने के समय इंडिया गठबंधन के नेताओं ने क्या भूमिका निभाई थी। शौकत अली ने सरकार से जनता के आक्रोश और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर ध्यान देने की अपील की।
