कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ममता का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल रिकॉर्ड सुधारने के लिए नहीं, बल्कि वोटरों को लिस्ट से बाहर करने के लिए किया जा रहा है।
तीन पन्नों के पत्र में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक भेदभाव और मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी तरह मशीनी हो गई है। यह सिर्फ तकनीकी आंकड़ों पर आधारित है और इसमें मानवीय समझ या संवेदनशीलता की भारी कमी है। उन्होंने साफ कहा कि इसका मकसद सुधार करना नहीं, बल्कि लोगों को हटाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नाम की स्पेलिंग या उम्र में छोटी-मोटी गलतियों के कारण आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्हें जबरदस्ती सुनवाई के लिए बुलाया जाता है, जिससे उनका उत्पीड़न होता है और उनकी मजदूरी का भी नुकसान होता है। ममता ने शादीशुदा महिलाओं की परेशानी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं को अपनी पहचान साबित करने के लिए बुलाया जा रहा है, जो उनका गंभीर अपमान है। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खास चुनाव क्षेत्रों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और बंगाल के लिए अलग पोर्टल का इस्तेमाल होने से अधिकारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस पत्र के बाद चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार है और यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है।
