अदालत के आदेश पर यूपी एसटीएफ की कार्रवाई, सर्वर हटते ही फास्टैग से टोल कटना बंद; करीब 10 कंप्यूटर सिस्टम हुए ठप
लखनऊ: लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग यानी एनएच-30 स्थित इटौंजा टोल प्लाजा पर यूपी एसटीएफ ने अदालत के आदेश के बाद कार्रवाई की है। एसटीएफ की टीम ने टोल प्लाजा के मुख्य सर्वर को सीज कर अपने कब्जे में ले लिया। मुख्य सर्वर हटाए जाने के बाद टोल की स्वचालित फास्टैग व्यवस्था प्रभावित हो गई और कई कंप्यूटर सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। इसके चलते टोल कर्मचारियों को वाहनों की आवाजाही सामान्य रखने के लिए बैरियर खोलने पड़े। टोल प्रबंधन के मुताबिक अब तक 25 हजार से अधिक वाहन बिना टोल शुल्क चुकाए निकल चुके हैं।
सीसीटीवी फुटेज को लेकर शुरू हुआ था मामला
बताया जा रहा है कि पूरे मामले की शुरुआत यूपी एसटीएफ की ओर से जनवरी से मार्च तक की सीसीटीवी फुटेज मांगे जाने के बाद हुई। टोल संचालक एजेंसी लखनऊ-सीतापुर एक्सप्रेसवे लिमिटेड का कहना था कि टोल प्लाजा के सिस्टम में करीब एक महीने तक की ही सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती है। एजेंसी के मुताबिक, उसने एक जनवरी से 31 मार्च तक वाहनों की आवाजाही और फास्टैग लेनदेन से जुड़ा पूरा उपलब्ध आंकड़ा एसटीएफ को पहले ही उपलब्ध करा दिया था। यह आंकड़ा करीब 28 से 30 पन्नों में दिया गया था।
अदालत की अनुमति के बाद सर्वर रूम पहुंची एसटीएफ
बताया गया कि उपलब्ध आंकड़ों के बावजूद एसटीएफ की टीम ने अदालत से अनुमति लेकर तकनीकी विशेषज्ञों के साथ टोल प्लाजा के सर्वर रूम में सर्च अभियान चलाया। एसटीएफ की टीम ने करीब एक घंटे तक सर्वर रूम और संबंधित सिस्टम की जांच की। इसके बाद मुख्य सर्वर को सील कर अपने साथ ले गई। सर्वर हटाए जाने के बाद टोल प्लाजा की स्वचालित व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई।
मुख्य सर्वर हटते ही करीब 10 सिस्टम हुए ठप
मुख्य सर्वर हटने के बाद टोल प्लाजा के करीब 10 कंप्यूटर सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। फास्टैग के जरिए टोल शुल्क की स्वचालित कटौती भी बंद हो गई। इसके बाद कर्मचारियों को वाहनों को रोककर मैनुअल तरीके से आगे भेजने में परेशानी होने लगी। वाहनों की रफ्तार धीमी होने के कारण टोल प्लाजा पर जाम जैसी स्थिति बन गई और वाहन चालकों को टोल पार करने में करीब 15 से 20 मिनट तक का समय लगने लगा।
बिना टोल शुल्क के गुजारे गए 25 हजार से ज्यादा वाहन
व्यवस्था बिगड़ने के बाद टोल प्रबंधन को कई वाहनों को बिना टोल शुल्क लिए आगे जाने देना पड़ा। टोल प्रबंधन के अनुसार सर्वर सीज होने के बाद अब तक 25 हजार से अधिक वाहन बिना टोल दिए इटौंजा टोल प्लाजा से गुजर चुके हैं। फिलहाल व्यवस्था को सामान्य करने के लिए सर्वर के स्थान पर वैकल्पिक तकनीकी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
रोज 18 से 20 लाख रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान
एसटीएफ की कार्रवाई के बाद टोल संचालन प्रभावित होने से एनएचएआई और टोल संचालक एजेंसी ने भी स्थिति पर आपत्ति जताई है। टोल के रेजिडेंट इंजीनियर प्रमोद सिंह के मुताबिक कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने में करीब 15 दिन तक का समय लग सकता है। टोल प्रबंधन के अनुसार एनएच-30 से रोजाना करीब 42 से 45 हजार वाहन गुजरते हैं। ऐसे में टोल वसूली प्रभावित होने के कारण प्रतिदिन करीब 18 से 20 लाख रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
एनएचएआई ने एसटीएफ अधिकारियों से की बातचीत
एनएचएआई के परियोजना निदेशक नवरत्न के मुताबिक इस मामले में एसटीएफ अधिकारियों से बातचीत हुई है। उनके अनुसार एसटीएफ की ओर से जांच पूरी होने के बाद सर्वर जल्द वापस करने का आश्वासन दिया गया है। फिलहाल एसटीएफ की कार्रवाई के बाद इटौंजा टोल प्लाजा पर फास्टैग आधारित स्वचालित टोल वसूली प्रभावित है और टोल प्रबंधन वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए संचालन सामान्य करने में जुटा है।
