लखनऊ में करीब 1.33 लाख ई-रिक्शा चलने की जानकारी पर अदालत ने जताई चिंता, प्रतिबंधित सड़कों पर नियमों का पालन कराने के लिए एसआईटी को दिए निर्देश
लखनऊ: राजधानी में ई-रिक्शा की लगातार बढ़ती संख्या और इससे लगने वाले जाम को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह के भीतर यह फैसला लेने का निर्देश दिया है कि लखनऊ समेत उन शहरों में ई-रिक्शा के नए पंजीकरण पर रोक लगाई जाए या नहीं, जहां इनकी संख्या जरूरत से अधिक हो चुकी है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि लखनऊ में करीब 1.33 लाख ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत पंजीकरण सीमित करने पर विचार
सोमवार को न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की पीठ ने अधिवक्ता सूरज सिंह विसेन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत उन क्षेत्रों में नए ई-रिक्शा के पंजीकरण को सीमित करने पर विचार किया जाए, जहां इनकी संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से पंजीकरण शुल्क में छूट दिए जाने का मतलब यह नहीं है कि ई-रिक्शा को सड़कों पर चलाने के लिए पंजीकरण जरूरी नहीं है। मोटर वाहन नियम, 1998 के नियम 178 का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के पास ई-रिक्शा की आवाजाही नियंत्रित करने का अधिकार है।
प्रतिबंधित सड़कों पर निगरानी की जिम्मेदारी एसआईटी को
हाईकोर्ट ने बताया कि 12 मई 2022 के आदेश के तहत लखनऊ की कई सड़कों पर ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाई गई थी, लेकिन इन प्रतिबंधों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा है। अदालत ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को मौजूदा प्रतिबंधों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी को यह भी जांचने को कहा गया है कि क्या दूसरे उपयुक्त इलाकों में भी ई-रिक्शा की आवाजाही पर इसी तरह रोक लगाई जा सकती है। हालांकि, अदालत ने यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखने की भी बात कही है। जिन रास्तों पर ई-रिक्शा प्रतिबंधित किए जाएं, वहां यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था करनी होगी। संबंधित अधिकारियों को आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी अदालत में पेश करनी होगी।
कमता चौराहे और चिनहट मार्ग के जाम का होगा तकनीकी आकलन
इसी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लखनऊ के कमता चौराहे और पॉलिटेक्निक-कमता-चिनहट मार्ग पर लगने वाले जाम का स्थायी समाधान निकालने पर भी जोर दिया। अदालत को बताया गया कि इस क्षेत्र में यातायात व्यवस्था का स्वतंत्र आकलन आईआईटी बीएचयू करेगा। संस्थान अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों का अध्ययन करेगा। इसके साथ ही यातायात अनुकरण अध्ययन कराया जाएगा और समस्या के समाधान के लिए तकनीकी व वित्तीय प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। हाईकोर्ट ने मामले में गठित कमेटी के सुझावों और लखनऊ नगर निगम की ओर से उठाए गए कदमों की समीक्षा जारी रखी है। अदालत ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम कर यातायात व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं। सरकार को चार सप्ताह में नए पंजीकरण पर फैसला लेना होगा, जबकि मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
