संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन, बरेली
हर साल 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकार, समानता और सम्मान के लिए जारी संघर्ष की याद दिलाने वाला दिन है। बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कहा कि इस दिन की जड़ें मजदूर आंदोलनों और समाजवादी विचारधारा से जुड़ी हुई हैं, लेकिन समय के साथ इसका स्वरूप काफी बदल गया है।
महिला आंदोलन से जुड़ी है महिला दिवस की शुरुआत
इतिहासकारों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं सदी के शुरुआती श्रमिक आंदोलनों से मानी जाती है।बताया जाता है कि 1900 के दशक की शुरुआत में अमेरिका में कपड़ा उद्योग में काम करने वाली महिलाओं ने लंबे कार्य घंटे, कम वेतन और असुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों के खिलाफ आंदोलन किया था। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका के समाजवादी समूहों ने 1909 में फरवरी के अंतिम रविवार को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया।
पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव
इसके बाद 1910 में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय समाजवादी महिला सम्मेलन में जर्मन समाजवादी नेता लुईस ज़ीट्ज़ ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे प्रसिद्ध समाजवादी कार्यकर्ता क्लारा ज़ेटकिन ने समर्थन दिया। इसके बाद 19 मार्च 1911 को ऑस्ट्रिया, जर्मनी, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड सहित कई देशों में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, जिसमें लगभग दस लाख से अधिक महिलाओं और पुरुषों ने रैलियों में हिस्सा लिया।
यह थीं महिलाओं की मांग
उस समय महिलाओं की प्रमुख मांगें थीं। इसमें मतदान का अधिकार, रोजगार के समान अवसर, शिक्षा और प्रशिक्षण का अधिकार, राजनीतिक पदों पर भागीदारी थी। इसके साथ ही भारत में महिलाओं के संघर्ष का गौरवपूर्ण इतिहास था है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार आंदोलनों में भी महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
महिला शिक्षा की अग्रदूत
सावित्रीबाई फुले ने 19वीं सदी में लड़कियों की शिक्षा के लिए ऐतिहासिक काम किया। वहीं 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ वीरता की मिसाल कायम की। आजादी के आंदोलन में दुर्गा भाभी जैसी क्रांतिकारी महिलाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2026 का संदेश : अधिकार, न्याय और कार्रवाई
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 का संदेश है कि “सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिकार, न्याय और कार्रवाई।”इसका अर्थ है कि अब केवल चर्चा नहीं बल्कि ठोस कदम उठाने का समय है, ताकि महिलाओं को हर क्षेत्र में समान अवसर और सुरक्षा मिल सके।
आज भी मौजूद हैं कई चुनौतियां
संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि आज भी महिलाओं को समाज में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें प्रमुख रूप से शिक्षा में असमानता, रोजगार के अवसरों में कमी, समान काम के लिए असमान वेतन, निर्णय लेने की प्रक्रिया में कम भागीदारी, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और भेदभाव है। हालांकि, आज महिलाएं विज्ञान, शिक्षा, राजनीति, प्रशासन और उद्योग जैसे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, लेकिन अभी भी उन्हें समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण समाज की प्रगति की आधारशिला
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के विकास का आधार है। जब तक महिलाओं का श्रम उचित मूल्य नहीं पाएगा, हिंसा और भेदभाव खत्म नहीं होंगे और आर्थिक व्यवस्था समानता पर आधारित नहीं होगी, तब तक महिला दिवस अपने मूल उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाएगा।
समान अवसर से ही मजबूत होगा समाज
उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और निर्णय लेने के समान अवसर दिए जाएं, तो न केवल परिवार बल्कि पूरा समाज और राष्ट्र मजबूत होगा। इसलिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव नहीं बल्कि एक संकल्प का दिन है, जो हमें याद दिलाता है कि नारी मुक्ति और समानता की लड़ाई अभी जारी है।
