नई दिल्ली : हैदराबाद से एक बड़े रियल एस्टेट घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां सैकड़ों घर खरीदारों के सपनों को कंपनी ने धोखे में बदल दिया। फ्लैट और विला देने का वादा कर लोगों से करोड़ों रुपये वसूल लिए गए, लेकिन न तो घर मिले और न ही पैसा वापस किया गया। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने इस मामले में मेसर्स साहती इंफ्राटेक वेंचर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (SIVPL) के पूर्व निदेशक और बिक्री एवं विपणन प्रमुख बी. लक्ष्मीनारायण और संधू पूर्णचंद्र राव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के मुताबिक, हैदराबाद में फ्लैट और विला सौंपने के नाम पर 700 से अधिक घर खरीदारों से करीब 360 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
ईडी की जांच तेलंगाना पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। आरोप है कि कंपनी ने “विश्व स्तरीय गेटेड कम्युनिटी” के नाम पर प्री-लॉन्च ऑफर का जमकर प्रचार किया और निवेशकों से भारी रकम वसूली। लेकिन बाद में न तो प्रोजेक्ट पूरा हुआ और न ही ग्राहकों को उनकी रकम लौटाई गई। जांच में सामने आया है कि SIVPL के पास जरूरी RERA और HMDA की अनुमति नहीं थी, न ही किसी प्रोजेक्ट के लिए एस्क्रो अकाउंट खोला गया था। निवेशकों से मिली रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा की गई और बड़ी मात्रा में नकद में भी पैसा वसूला गया, जिसे कंपनी के खातों में दर्ज तक नहीं किया गया।
ईडी के मुताबिक, आरोपियों ने बिना किसी वैध अनुमति के इन्वेंट्री बेचकर 800 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई। केवल सरवानी एलीट प्रोजेक्ट के नाम पर ही 216.91 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद वसूला गया। यह पैसा फर्जी बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए संबंधित और असंबंधित कंपनियों व व्यक्तियों को ट्रांसफर कर गबन किया गया। इतना ही नहीं, जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बी. लक्ष्मीनारायण और उनके परिवार के सदस्यों ने अपराध की आय विदेशों में बैंक खातों में ट्रांसफर की। वहीं संधू पूर्णचंद्र राव पर करीब 126 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है, जिसमें 50 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद शामिल है।
फोरेंसिक ऑडिट के बाद जब गबन का खुलासा हुआ, तो बी. लक्ष्मीनारायण ने संधू पूर्णचंद्र राव के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज कराईं। बाद में इन एफआईआर को वापस लेने के बदले दोनों के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत 21 अचल संपत्तियां कर्मचारियों और अन्य लोगों के नाम पर ट्रांसफर की गईं, जिनका वास्तविक लाभ बी. लक्ष्मीनारायण को मिला। इससे पहले ईडी ने कई ठिकानों पर छापेमारी कर आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए थे। कई बैंक खाते फ्रीज किए गए और 169.15 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई थीं।
ईडी ने बताया कि बी. लक्ष्मीनारायण को 29 सितंबर 2024 और संधू पूर्णचंद्र राव को 25 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। अब ईडी, हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत पूरक अभियोग शिकायत दाखिल की है, जिस पर 5 जनवरी को अदालत ने संज्ञान ले लिया है। यानी साफ है कि फ्लैट और विला के नाम पर लोगों की मेहनत की कमाई हड़पने वाले इस रियल एस्टेट घोटाले में जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।
