लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में सोमवार को वर्टिकल इंटरैक्शन कोर्स की शुरुआत की गई। इसका उद्घघाटन प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने किया। इस कार्यक्रम में BPR&D के एडीजी जोसेफ आर. के. लोक्कू भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। DGP ने इस अवसर पर एडवांस डिजिटल डायग्नोस्टिक कक्ष का भी उद्घाटन किया और साइबर अपराधों से लड़ने के लिए तकनीकी दक्षता की आवश्यकता पर जोर दिया।
अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई को कानून, तकनीक और फॉरेंसिक का ज्ञान जरूरी

डीजीपी ने अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए कानून, तकनीक और फॉरेंसिक का ज्ञान जरूरी बताया। बोले, ‘लॉ विद लैब’ की अवधारणा पर आधारित है UPSIFS का प्रशिक्षण। इससे साइबर अपराधियों से लड़ने के लिए हर पुलिस अधिकारी को तकनीकी रूप से दक्ष बनना होना होगा। ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए बोले, अब युद्ध साइबर स्पेस में लड़े जा रहे हैं। BPR&D के ADG जोसेफ लोक्कू ने कहा कि UPSIFS केंद्रीय संस्थानों की बराबरी कर रहा है। संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने प्रशिक्षण के विजन और मिशन को किया स्पष्ट
अब साइबर स्पेस में युद्ध

उन्होंने यह भी कहा कि “अब युद्ध ज़मीन पर नहीं, साइबर स्पेस में लड़े जा रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर इसका उदाहरण है, जहां न कोई सैनिक सीमा पार गया और न कोई गोली चली, तकनीक ही हथियार थी।” उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि प्रशिक्षण का यह ज्ञान अपने सिस्टम में लागू करें, ताकि पुलिसिंग और जनसेवा अधिक दक्ष हो सके। ADG जोसेफ आर. के. लोक्कू ने संस्थान की तीव्र प्रगति की सराहना की और कहा कि UPSIFS अब केंद्रीय संस्थानों की बराबरी पर खड़ा हो रहा है। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने बताया कि “लॉ विद लैब” की अवधारणा पर आधारित कोर्स का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को साइबर और फॉरेंसिक साइंस में सशक्त बनाना है।
यह अधिकारी थे मौजूद

इस अवसर पर ADG राजीव मल्होत्रा, ASP चिरंजीब मुखर्जी, डॉ. श्रुति दास, श्री चंद्रमोहन सिंह, डॉ. सपना शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, फैकल्टी सदस्य और प्रशिक्षणार्थी IPS अधिकारी उपस्थित रहे।
