2022 के चुनावी अनुभव से सबक लेने की तैयारी, आर्थिक रूप से मजबूत और जमीनी पकड़ वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता; सपा के साथ सीट बंटवारे पर भी जारी है खींचतान
मेरठ: उत्तर प्रदेश में लंबे समय से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी इस बार उम्मीदवारों के चयन से लेकर सीट बंटवारे तक अलग रणनीति अपनाने पर विचार कर रही है। पार्टी के भीतर ऐसी चर्चा है कि 2027 में आर्थिक रूप से मजबूत उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि चुनाव प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए पार्टी पर पूरी तरह आर्थिक निर्भरता न रहे।
2022 के अनुभव से कांग्रेस ले रही सबक
कांग्रेस के सामने 2022 विधानसभा चुनाव का अनुभव सबसे बड़ी चुनौती के रूप में है। रिपोर्टों के मुताबिक उस चुनाव में कई मजबूत माने जा रहे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए पार्टी की ओर से करीब 50 से 80 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी गई थी। चुनाव के बाद पार्टी के भीतर कुछ उम्मीदवारों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। आरोप था कि पार्टी से मिले चुनावी फंड का प्रचार में अपेक्षित स्तर पर इस्तेमाल नहीं किया गया और कुछ उम्मीदवारों ने रकम बचा ली। इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ा। 2022 में कांग्रेस ने प्रदेश की 399 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन पार्टी को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी। इस प्रदर्शन के बाद अब पार्टी उम्मीदवारों की आर्थिक क्षमता और चुनावी संसाधनों को भी चयन का एक महत्वपूर्ण आधार बनाने पर विचार कर रही है।
‘पैसे वालों’ पर दांव लगाने की तैयारी
कांग्रेस के एक पदाधिकारी के मुताबिक, 2027 के चुनाव में पार्टी आर्थिक रूप से सक्षम उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की रणनीति पर आगे बढ़ सकती है। ऐसे उम्मीदवारों से उम्मीद होगी कि वे अपने चुनाव प्रचार और स्थानीय चुनावी व्यवस्था का बड़ा हिस्सा खुद संभाल सकें। पार्टी का मानना है कि इससे चुनाव के दौरान कांग्रेस की ओर से दिए जाने वाले फंड को लेकर विवाद कम होंगे। साथ ही पार्टी पर उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन जुटाने का दबाव भी कम हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होगा कि केवल धनाढ्य उम्मीदवारों को ही टिकट दिया जाएगा। जिन कार्यकर्ताओं की क्षेत्र में मजबूत पकड़ होगी और जिनके जीतने की संभावना अधिक होगी, उन्हें उनकी आर्थिक स्थिति के बावजूद प्राथमिकता देने की गुंजाइश रखी जाएगी।
उम्मीदवारों से पार्टी फंड में योगदान की भी उम्मीद
कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती पार्टी के आर्थिक संसाधनों की भी है। पार्टी के भीतर यह तर्क दिया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता से बाहर होने के बाद पहले की तुलना में चंदे और आर्थिक संसाधनों की स्थिति कमजोर हुई है। ऐसे में पार्टी आर्थिक रूप से सक्षम उम्मीदवारों से चुनाव लड़ने के साथ-साथ पार्टी फंड में योगदान की भी उम्मीद कर रही है। कांग्रेस का मानना है कि मजबूत आर्थिक आधार वाले उम्मीदवार चुनाव में संसाधनों की कमी से प्रभावित हुए बिना ज्यादा प्रभावी तरीके से मुकाबला कर सकते हैं।
80 के दशक से यूपी की सत्ता से बाहर कांग्रेस
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है। अस्सी के दशक के बाद पार्टी लगातार अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश करती रही है। कभी कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़कर तो कभी गठबंधन के सहारे सत्ता में वापसी की कोशिश की, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इन वर्षों में पार्टी ने कई प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी बदले। प्रियंका गांधी को भी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी देकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश की गई, लेकिन कांग्रेस को प्रदेश की राजनीति में पहले जैसी मजबूती हासिल नहीं हो सकी।
राहुल गांधी की सक्रियता से कांग्रेस को उम्मीद
कांग्रेस के एक वरिष्ठ प्रदेश पदाधिकारी का दावा है कि फिलहाल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सक्रियता से पार्टी के पक्ष में राजनीतिक माहौल बनता दिखाई दे रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि राहुल गांधी की राजनीतिक सक्रियता और विपक्षी दलों के साथ तालमेल से 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हो सकती है। यूपी में समाजवादी पार्टी कांग्रेस की प्रमुख गठबंधन सहयोगी रही है। ऐसे में कांग्रेस की कोशिश आगामी विधानसभा चुनाव में सपा से अधिक सीटें हासिल करने की है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर अभी से राजनीतिक चर्चा और खींचतान की स्थिति बनी हुई है।
सपा से 115 से 120 सीटों तक की मांग की चर्चा
कांग्रेस की ओर से कभी 50-50 के फार्मूले की बात सामने आती है तो कभी पिछले चुनावों में दोनों दलों के प्रदर्शन को आधार बनाकर सीटों की मांग रखी जाती है। हालांकि अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही होना है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक कांग्रेस करीब 115 से 120 विधानसभा सीटों पर समझौते के लिए तैयार हो सकती है। हालांकि सीटों का वास्तविक बंटवारा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद ही तय होगा। कुल मिलाकर कांग्रेस 2027 में केवल गठबंधन के भरोसे चुनाव लड़ने के बजाय ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है, जो संगठन, जनाधार और आर्थिक संसाधनों के मामले में खुद मजबूत हों। अब देखना होगा कि यह रणनीति कांग्रेस को उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में कितनी मजबूती दे पाती है।
