11.443 हेक्टेयर जमीन को चार खरीदार पहुंचे लेकिन एक ने ही जमा किया डिमांड ड्राफ्ट,एडीएम के सोमवार को प्रक्रिया आगे बढ़ाने के आश्वासन पर किसान शांत
बरेली : केसर चीनी मिल पर बकाया गन्ना भुगतान मिलने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। मुड़िया मुकर्रमपुर स्थित मिल से जुड़ी 11.443 हेक्टेयर जमीन की नीलामी शनिवार यानी 24 अक्टूबर को नहीं हो सकी।नीलामी में हिस्सा लेने के लिए चार खरीदार तहसील पहुंचे, लेकिन इनमें से केवल एक खरीदार की ओर से ही डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) जमा किया गया आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण नीलामी आगे नहीं बढ़ सकी। इससे नाराज किसानों और किसान नेताओं ने तहसील परिसर में हंगामा किया। इसके बाद में एडीएम संतोष कुमार के सोमवार को खरीदारों के डीडी के साथ पहुंचने पर नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के आश्वासन के बाद किसान शांत हुए।
करीब 35 करोड़ रुपये रखा गया है न्यूनतम बोली मूल्य
केसर चीनी मिल की जमीन की नीलामी के लिए 24 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई थी।इसके तहत 11.443 हेक्टेयर जमीन का न्यूनतम बोली मूल्य करीब 35 करोड़ रुपये तय किया गया। लंबे समय से गन्ना मूल्य भुगतान का इंतजार कर रहे किसानों को उम्मीद थी कि जमीन की नीलामी से मिल पर बकाया रकम की वसूली का रास्ता खुलेगा और उनका भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसी उम्मीद के साथ किसान और किसान नेता भी तहसील परिसर पहुंचे थे।
चार खरीदार पहुंचे, सिर्फ एक का डीडी जमा
नीलामी में भाग लेने के लिए चार संभावित खरीदार पहुंचे थे। इनमें किच्छा निवासी ग्यारसी लाल अग्रवाल, रुद्रपुर निवासी पुनीत अग्रवाल की एपी ट्रेडर्स,एसएनजी इंफ्रा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड और किच्छा निवासी अजय पाल यादव शामिल थे।हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार केवल एसएनजी इंफ्रा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड की ओर से ही डिमांड ड्राफ्ट जमा किया गया। बाकी तीन खरीदारों के डीडी जमा नहीं होने के कारण नीलामी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
नीलामी टलते ही किसानों का चढ़ा पारा
नीलामी की प्रक्रिया रुकने की जानकारी मिलते ही तहसील परिसर में मौजूद किसानों और किसान नेताओं में नाराजगी फैल गई। उन्होंने हंगामा करते हुए बकाया गन्ना भुगतान का मुद्दा उठाया। किसानों का कहना था कि वे लंबे समय से अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।ऐसे में जमीन की नीलामी बार-बार टलने से उनकी परेशानी बढ़ रही है। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार नीलामी की प्रक्रिया पूरी होगी, लेकिन ऐसा नहीं होने से उन्हें फिर इंतजार करना पड़ रहा है।
एडीएम के आश्वासन पर शांत हुए किसान
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम संतोष कुमार ने किसानों को समझाया। उन्होंने बताया कि नीलामी की निर्धारित प्रक्रिया के तहत पर्याप्त खरीदारों और आवश्यक दस्तावेजों की शर्तें पूरी होना जरूरी है। चार खरीदारों के पहुंचने के बावजूद केवल एक डीडी जमा होने के कारण शनिवार को नीलामी नहीं हो सकी। एडीएम ने आश्वासन दिया कि सोमवार को खरीदार डीडी के साथ पहुंचते हैं तो नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद किसानों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया।
अब सोमवार पर टिकी किसानों की निगाहें
केसर चीनी मिल की जमीन की नीलामी टलने के बाद अब किसानों की निगाहें सोमवार को प्रस्तावित अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। किसानों को उम्मीद है कि इस बार आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होंगी और जमीन की बिक्री का रास्ता साफ होगा। हालांकि, सोमवार को नीलामी वास्तव में हो पाएगी या नहीं, यह खरीदारों के डीडी जमा करने और अन्य जरूरी शर्तें पूरी होने पर निर्भर करेगा।
जमीन की नीलामी होने के बाद किसानों को बकाया
गन्ना भुगतान कब और कितना मिलेगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि लंबे समय से अटका उनका भुगतान कब तक मिल पाएगा। इस दौरान एडीएम संतोष कुमार, एसडीएम गोपाल शर्मा, तहसीलदार भानु प्रताप सिंह, सीओ अजय कुमार, इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा, केसर मिल के जीएम शरद मिश्रा, मिल के अन्य अधिकारी, किसान नेता और किसान मौजूद रहे।
